
Mahakal Ki Mahagatha
सृष्टि के आरंभ में, जब न धरती थी, न आकाश, सिर्फ एक अनंत शून्य फैला था, तब उस मौन अंधकार में एक ऐसी शक्ति मौजूद थी जिसे न देखा जा....
सृष्टि के आरंभ में, जब न धरती थी, न आकाश, सिर्फ एक अनंत शून्य फैला था, तब उस मौन अंधकार में एक ऐसी शक्ति मौजूद थी जिसे न देखा जा सकता था, न छुआ जा सकता था। यह वो अनादि सत्ता थी जो जन्म और मृत्यु से परे थी, जिसे युगों बाद संसार ने 'शिव' नाम दिया। लेकिन जब ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का प्रश्न उठा, तो अचानक एक विशाल अग्नि-स्तंभ प्रकट हुआ, जिसकी न आदि थी न अंत। इस अनंत प्रकाश ने दोनों देवताओं को अपनी सीमाओं का एहसास कराया, पर यह सिर्फ एक शुरुआत थी। हिमालय की एकांत चोटी पर ध्यानमग्न महादेव ने अपनी आँखें क्यों खोलीं, जब एक साधारण कन्या का जन्म हुआ? क्या यह सिर्फ एक बच्ची का आगमन था, या उस शक्ति का संकेत, जो एक दिन सृष्टि का संतुलन बदल देगी?
- E1. जब सृष्टि भी नहीं थी
- E2. शक्ति का जन्म
- E3. वो तपस्या जिसने महादेव को झुका दिया
- E4. महादेव की बारात
- E5. दक्ष का अहंकार
- E6. सती का अंतिम निर्णय
- E7. वीरभद्र का प्रलय-प्रस्थान
- E8. देवताओं के सामने महादेव का रौद्र
- E9. दक्ष का सिर और महादेव का क्रोध
- E10. वह वरदान जिसने देवताओं को डरा दिया
- E11. हिमालय की गोद में शक्ति का पुनर्जन्म
- E12. वो रिश्ता जिसे महादेव भूल चुके थे
- E13. उमा का संकल्प
- E14. जब महादेव ने खुद को ही बुरा कहा
- E15. मेना की शर्त
- E16. सात ऋषियों की परीक्षा
- E17. कैलाश से निकली वह बारात
- E18. दूल्हे का वह रूप, जिसे देखकर मेना काँप उ
- E19. कैलाश पर लौटे महादेव
- E20. देवताओं की आखिरी उम्मीद
Borni — 5/5 — 7 days ago
nice