
Mahakal Ki Mahagatha
सृष्टि के आरंभ में, जब न धरती थी, न आकाश, सिर्फ एक अनंत शून्य फैला था, तब उस मौन अंधकार में एक ऐसी शक्ति मौजूद थी जिसे न देखा जा....
सृष्टि के आरंभ में, जब न धरती थी, न आकाश, सिर्फ एक अनंत शून्य फैला था, तब उस मौन अंधकार में एक ऐसी शक्ति मौजूद थी जिसे न देखा जा सकता था, न छुआ जा सकता था। यह वो अनादि सत्ता थी जो जन्म और मृत्यु से परे थी, जिसे युगों बाद संसार ने 'शिव' नाम दिया। लेकिन जब ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का प्रश्न उठा, तो अचानक एक विशाल अग्नि-स्तंभ प्रकट हुआ, जिसकी न आदि थी न अंत। इस अनंत प्रकाश ने दोनों देवताओं को अपनी सीमाओं का एहसास कराया, पर यह सिर्फ एक शुरुआत थी। हिमालय की एकांत चोटी पर ध्यानमग्न महादेव ने अपनी आँखें क्यों खोलीं, जब एक साधारण कन्या का जन्म हुआ? क्या यह सिर्फ एक बच्ची का आगमन था, या उस शक्ति का संकेत, जो एक दिन सृष्टि का संतुलन बदल देगी?