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सुन मेरे हमसफ़र

सुन मेरे हमसफ़र

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4.9
|122
Romance

" उम्म... मुझसे दूर मत जाओ , मुझे पास रहने दो ", प्रेम ने नशे में चांदनी को गले से लगाते हुए कहा । चांदनी स्तब्द खड़ी रही । वो....

" उम्म... मुझसे दूर मत जाओ , मुझे पास रहने दो ", प्रेम ने नशे में चांदनी को गले से लगाते हुए कहा । चांदनी स्तब्द खड़ी रही । वो पूरी तरह से उसे बाहों में जकड़ चुका था । वो किसी भी लड़की से कभी बात नहीं किया करता था , लेकिन आज वो चांदनी को गले लगाकर उसे पास रहने को कह रहा था । डॉक्टर प्रेम अग्निहोत्री एक जाना माना सर्जन , जो जिंदगी की किसी चुनौती से नहीं हारता , पर अपनी प्रेमिका के धोखे से टूटकर बिखर गया है। एक धोखा उसे प्यार के उपर से विश्वास उठा देने पर मजबूर कर गया है । वहीं, एक नई इंटर्न, चांदनी पुरोहित , जब उसकी जिंदगी में आती है तो प्रेम का ध्यान उसकी मासूमियत और शरारती हरकतों की तरफ आकर्षित होता है । सालों से उदासी में घिरा प्रेम , चांदनी के चुलबुले और खुशमिजाज स्वभाव में अपनी खुशी देखने लगता है । लेकिन फिर भी दिल में धोखे का गुस्सा उसे अपनी भावनाएं समझने से रोकता रहता है । प्यार जैसा कुछ महसूस करना अब उसके लिए मुश्किल है । क्या प्रेम अपने अतीत के घावों से उभर पाएगा ? क्या चांदनी की मासूमियत उसके दिल में फिर से प्यार की उम्मीद जगाएगी, या फिर प्रेम की नफ़रत उसे इसी दलदल में डूबा देगी ? क्या ये दोनों एक-दूसरे के हमसफर बन पाएंगे ?,