
मौन सुपर वैद्य
अमरगढ़ हवेली की रसोई में आधी रात को एक आदमी चुपचाप जड़ी-बूटियों से दवा बनाता है, जिसे सब 'निकम्मा दामाद' कहते हैं। उसकी उंगलियों में वो जादू है जो किसी....
अमरगढ़ हवेली की रसोई में आधी रात को एक आदमी चुपचाप जड़ी-बूटियों से दवा बनाता है, जिसे सब 'निकम्मा दामाद' कहते हैं। उसकी उंगलियों में वो जादू है जो किसी भी बीमारी को छूकर ठीक कर देता है, लेकिन वो इसे एक रहस्य बनाए रखता है। जब हवेली की मालकिन सरला देवी अचानक बीमार पड़ती हैं और डॉक्टर भी हार मान लेते हैं, तो यही 'निकम्मा' दामाद, आरव, अपनी रहस्यमयी शक्तियों से उन्हें ठीक कर देता है। हवेली में कोई नहीं जानता कि यह साधारण सा दिखने वाला आदमी कौन है, और उसके हाथों में यह अद्भुत शक्ति कहाँ से आई। क्या आरव अपनी पहचान छिपा पाएगा, या उसकी रहस्यमयी हीलिंग पावर उसे एक ऐसे खतरे में डाल देगी जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी?
- E1. निकम्मा दामाद
- E2. तराज़ू का झूठ
- E3. सोने का कंगन
- E4. सास की नींद
- E5. पहली नब्ज़
- E6. पीछे का दरवाज़ा
- E7. घाट की रात
- E8. बंद संदूक की लोरी
- E9. दावत का हिसाब
- E10. जिसने ठंडा पानी माँगा
- E11. माँ की बही
- E12. बड़े साहब के बोल
- E13. जिस दिन काव्या रोती थी
- E14. अधूरी चिट्ठी
- E15. चाचा की बही
- E16. ख़ाली जगह का निशान
- E17. चौथा सूत्र
- E18. छलनी के पार
- E19. दीवान साहब का क़ाफ़िला
- E20. पिता और पुत्र