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महाकाल महागाथा
COMPLETED SERIES

महाकाल महागाथा

8 PlaysMythology

सृष्टि के जन्म से पहले, जब न दिन था न रात, न सूर्य का तेज न चंद्रमा की चांदनी, तब केवल एक असीम, गहरा अंधकार व्याप्त था। इसी परम शून्य....

सृष्टि के जन्म से पहले, जब न दिन था न रात, न सूर्य का तेज न चंद्रमा की चांदनी, तब केवल एक असीम, गहरा अंधकार व्याप्त था। इसी परम शून्य में विराजमान थे महाकाल, स्वयं काल के भी नियंता, जिनका न कोई आदि है न अंत। पर जब उनके भीतर सृष्टि रचना की सूक्ष्म स्पंदन हुई, तो उस परम शून्य में 'ॐ' का अनाहत नाद प्रकट हुआ, जिसने महा-अंधकार में पहली हलचल मचाई। इसी से ब्रह्मा और विष्णु का प्रादुर्भाव हुआ, लेकिन माया के प्रभाव से वे अपने वास्तविक स्रोत से अनभिज्ञ, श्रेष्ठता के अहंकार में एदूसरे से भिड़ गए। उनकी यह अहंकारी युद्ध पूरी सृष्टि को भस्म करने पर उतारू है। क्या कोई शक्ति इस प्रलयंकारी संघर्ष को रोक पाएगी, या यह नवजात ब्रह्मांड अपने जन्म से पहले ही विनाश को प्राप्त होगा? ईस स्टोरी में महाकाल ओर पार्वती माता ओर उनके नये अंश कहानी है इसे ध्यांसे सुने श्रृष्टि के जीवन से ओर नया नई दिशा इसमें है