
देशभक्ति
Book Description — “तिरंगे की कसम” जब दोस्ती और देश के बीच चुनाव करना पड़े… तो क्या दिल जीतेगा या तिरंगा? “तिरंगे की कसम” एक ऐसी देशभक्ति कथा है, जहाँ तीन बचपन....
Book Description — “तिरंगे की कसम” जब दोस्ती और देश के बीच चुनाव करना पड़े… तो क्या दिल जीतेगा या तिरंगा? “तिरंगे की कसम” एक ऐसी देशभक्ति कथा है, जहाँ तीन बचपन के दोस्त — आरव, कबीर और राघव — एक ही सपना देखते हैं: वर्दी पहनकर देश की सेवा करना। एक छोटे से गाँव के पीपल के पेड़ के नीचे, 15 अगस्त के दिन, वे तिरंगे को देखकर कसम खाते हैं — देश से कभी गद्दारी नहीं करेंगे। समय बदलता है। रास्ते बदलते हैं। पर कसम…? आरव सेना में भर्ती हो जाता है। वो अपने शहीद पिता का सपना पूरा करता है और सीमा पर देश की रक्षा में खड़ा होता है। लेकिन दूसरी तरफ… कबीर असफलताओं से टूट जाता है। राघव सिस्टम से निराश होकर अंदर ही अंदर बदलने लगता है। सालों बाद, सीमा पर एक ऑपरेशन के दौरान आरव का सामना उसी दोस्त से होता है… जो अब दुश्मन की तरफ खड़ा है। एक गोली… एक सच… और एक सवाल — देश से गद्दारी की शुरुआत आखिर होती कहाँ से है? जांच आगे बढ़ती है तो पता चलता है कि साजिश सिर्फ सीमा के उस पार से नहीं है… बल्कि अंदर से भी है। ऊँचे पदों पर बैठे लोग… गुप्त मीटिंग… लीक होती जानकारी… अब आरव की लड़ाई सिर्फ आतंकवादियों से नहीं, बल्कि उस छुपे हुए दुश्मन से है जो वर्दी पहनकर ही देश को कमजोर कर रहा है। हर Episode में खुलते रहस्य, दोस्ती और विश्वास की टूटती डोर, मां के आंसू, शहीद पिता की याद, और तिरंगे के लिए जान देने का जज़्बा — इस कहानी को सिर्फ एक Thriller नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा बना देता है। “तिरंगे की कसम” एक Military Conspiracy Thriller है, जहाँ गोलियों से ज्यादा खतरनाक होते हैं फैसले। जहाँ दुश्मन की पहचान आसान नहीं। और जहाँ सच्ची देशभक्ति सिर्फ शब्दों में नहीं… बल्कि बलिदान में दिखाई देती है। ये कहानी उन लोगों के लिए है जो वर्दी को सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि सम्मान मानते हैं। उनके लिए जो मानते हैं कि देशभक्ति नारा नहीं — जिम्मेदारी है। जब हर तरफ साजिश हो… जब अपनों पर ही शक करना पड़े… जब दोस्त दुश्मन बन जाएं… तब एक सैनिक क्या करेगा? क्या आरव अपनी कसम निभा पाएगा? क्या सच सामने आएगा? या देश के नाम पर रचा गया खेल और गहरा होगा? “तिरंगे की कसम” आपको सीमा की ठंडी रातों से लेकर सत्ता के बंद कमरों तक ले जाएगी — जहाँ हर कदम पर खतरा है… और हर मोड़ पर एक नया सच। क्योंकि आखिर में सवाल सिर्फ एक है — क्या आप तिरंगे की कसम निभा पाएंगे?
- E1. तिरंगे की कसम
- E2. गद्दारी की जड़
- E3. विश्वास का टूटना
- E4. ऑपरेशन की परछाईं
- E5. आख़िरी सांस तक
- E6. अधूरा मिशन
- E7. अंतिम कसम
- E8. सरहद के उस पार
- E9. विश्वास की ढाल
- E10. अंतिम प्रहार
- E11. नई सुबह का प्रहरी
- E12. अंतिम चौकी का संकल्प
- E13. वीरों की शपथ
- E14. सीमा के उस पार की चुनौती
- E15. अनदेखी नजर
- E16. शक की रेखा
- E17. भरोसे की पहली परीक्षा
- E18. असली खेल शुरू
- E19. काउंटडाउन के खिलाफ
- E20. आमना सामना