
चीख की खजाना
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आधी रात, मूसलाधार बारिश और एक सुनसान हवेली जहाँ सदियों से एक क्रूर बादशाह की आत्मा भटकती है। पत्रकार विक्रम, इस खौफनाक रहस्य को उजागर करने निकला है, लेकिन उसे....
आधी रात, मूसलाधार बारिश और एक सुनसान हवेली जहाँ सदियों से एक क्रूर बादशाह की आत्मा भटकती है। पत्रकार विक्रम, इस खौफनाक रहस्य को उजागर करने निकला है, लेकिन उसे नहीं पता कि वह मौत के जाल में फंस चुका है। हवेली की दीवारों से आती डरावनी हंसी और चीखें, हर कदम पर खून के निशान, और फिर शीशे में दिखने वाला वो भयानक साया... बेताज बादशाह, जिसकी लाल आँखें सिर्फ मौत का पैगाम लाती हैं। विक्रम को लगता है कि वह इस हवेली के तहखाने में छिप सकता है, लेकिन क्या वह उस खौफनाक बादशाह के कटे हुए सिर का राज़ सुलझा पाएगा, या यह हवेली उसकी आखिरी चीख का खजाना बन जाएगी?