
Yuddh Dev Ka Uttradhikari
युद्ध देव का उत्तराधिकारी एक ऐसी महागाथा है जो एक ऐसे बालक आर्य की कहानी बताती है जिसे उसके ही जन्म के बाद उसके ही राजमहल में स्वीकार नहीं किया....
युद्ध देव का उत्तराधिकारी एक ऐसी महागाथा है जो एक ऐसे बालक आर्य की कहानी बताती है जिसे उसके ही जन्म के बाद उसके ही राजमहल में स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि उसकी माँ मालिनी एक दासी थी और उसके पिता महान सूर्यवर्धन साम्राज्य के सम्राट थे, लेकिन महल की तीन महारानियों ने उसे कभी भी एक वैध उत्तराधिकारी के रूप में नहीं देखा और उसे हमेशा अपमान, तिरस्कार और पीड़ा के बीच बड़ा किया गया, जहाँ उसे कभी राजकुमारों जैसे वस्त्र नहीं मिले बल्कि पुराने और फटे हुए कपड़े पहनने को मजबूर किया गया जो पहले राजकुमारों द्वारा त्याग दिए गए होते थे, उसे महल में कभी सम्मान नहीं मिला बल्कि हर जगह उसे नीची नजरों से देखा गया, उसे भोजन के नाम पर केवल बचा-खुचा भोजन मिलता था और राजमहल के बच्चों द्वारा उसे बार-बार अपमानित किया जाता था, लेकिन इसी अपमान और दर्द के बीच आर्य के जीवन में एक रहस्यमयी मोड़ तब आता है जब वह महल के एक निषिद्ध हिस्से में पहुँचता है जहाँ एक विशाल प्राचीन पत्थर का द्वार मौजूद होता है जिस पर रहस्यमयी चिन्ह बने होते हैं और जैसे ही वह उस द्वार के पास जाता है उसके शरीर में एक अजीब सी ऊर्जा जागने लगती है और उसे एक अनजानी आवाज सुनाई देती है जो उसे “उत्तराधिकारी” कहकर पुकारती है और धीरे-धीरे उसके जीवन में ऐसे रहस्य खुलने लगते हैं जो उसके पूरे भविष्य को बदलने वाले होते हैं, उसी समय महल के अंदर राजनीति और षड्यंत्र अपने चरम पर पहुँच जाते हैं जहाँ महारानी सुरंजना आर्य को अपने पुत्रों के लिए खतरा मानकर उसे समाप्त करने की योजना बनाने लगती है लेकिन सीधे उसे मारने के बजाय वह उसे धीरे-धीरे महल से बाहर निकालने की योजना बनाती है ताकि कोई शक भी न हो और इसी योजना के तहत आर्य की माँ मालिनी को झूठे आरोप में जेल में डाल दिया जाता है और आर्य को धोखे से उत्तरी वन में एक काम के बहाने भेज दिया जाता है जहाँ उसे मौत के मुंह में धकेलने की योजना होती है क्योंकि उत्तरी वन एक ऐसा स्थान है जहाँ जंगली जानवर, डाकू और अज्ञात शक्तियाँ हमेशा सक्रिय रहती हैं, लेकिन आर्य जो अभी केवल एक छोटा बच्चा है अपनी माँ को बचाने और उसके लिए न्याय पाने की आशा में बिना किसी डर के उस खतरनाक यात्रा पर निकल पड़ता है और जैसे ही वह महल की सीमा पार करता है उसका सामना एक बिल्कुल नई दुनिया से होता है जहाँ हर कदम पर खतरा छिपा होता है और रास्ते में उसकी मुलाकात एक घायल वृद्ध साधक शाल्व से होती है जो उसे बचाता है और उसे देखकर महसूस करता है कि यह कोई साधारण बालक नहीं है बल्कि किसी महान शक्ति से जुड़ा हुआ है और इसी बीच जंगल में भाड़े के हत्यारे उसका पीछा करते हैं और उसे खत्म करने की योजना बनाते हैं लेकिन तभी आर्य के भीतर वह रहस्यमयी शक्ति जागने लगती है जो सुनहरी ऊर्जा के रूप में प्रकट होती है और एक विशाल जंगली भेड़िया भी उसकी शक्ति के सामने झुक जाता है जिससे यह साबित होता है कि उसके भीतर कोई दिव्य शक्ति छुपी हुई है और वहीं से कहानी एक नए मोड़ पर पहुँचती है जहाँ “छाया रक्षक कर्णेश” नाम का एक रहस्यमयी योद्धा प्रकट होता है जो खुद को आर्य की छाया बताता है और उसे हर खतरे से बचाने लगता है लेकिन वह कौन है, कहाँ से आया है और क्यों आर्य की रक्षा कर रहा है यह अभी तक एक बहुत बड़ा रहस्य बना हुआ है और दूसरी ओर महल में मालिनी जेल में बंद है और अपने बेटे की चिंता में हर पल टूट रही है जबकि महारानी सुरंजना का षड्यंत्र और भी गहरा होता जा रहा है और वह धीरे-धीरे पूरे साम्राज्य की राजनीति को आर्य के खिलाफ मोड़ रही है ताकि भविष्य में कोई भी उसे सिंहासन का उत्तराधिकारी न मान सके, लेकिन कहानी का सबसे बड़ा रहस्य अभी बाकी है क्योंकि वह रहस्यमयी पत्थर का द्वार, वह सुनहरी तलवार जो महल के नीचे छिपी है और वह आवाज जो आर्य को “युद्ध देव का उत्तराधिकारी” कहती है, यह सब संकेत देते हैं कि आर्य का जन्म साधारण नहीं है बल्कि वह एक ऐसी प्राचीन शक्ति का वाहक है जो पूरे साम्राज्य ही नहीं बल्कि पूरे संसार की नियति बदल सकती है, जैसे-जैसे आर्य आगे बढ़ता है वैसे-वैसे उसके जीवन में दर्द, अपमान, संघर्ष, विश्वासघात और रहस्यमयी शक्तियाँ उसे एक ऐसे रास्ते पर धकेलती हैं जहाँ से वापसी संभव नहीं है और हर कदम उसे एक महान योद्धा बनने की ओर ले जा रहा है।
- E1. अभागे राजकुमार का जन्म
- E2. पहली पुकार
- E3. महारानी का षड्यंत्र
- E4. दासी पुत्र का दर्द
- E5. महल से निष्कासन का षड्यंत्र
- E6. उत्तरी वन का रहस्य
- E7. छाया का शिकारी
- E8. छाया का सच और रक्त का संकेत
- E9. युद्ध देव की चेतना
- E10. महल में गूंजती चेतावनी
- E11. अपमान की आग
- E12. पहला कदम शक्ति की ओर
- E13. संघर्ष की पहली सीढ़ी
- E14. पहली परीक्षा
- E15. साहस का मूल्य
- E16. जंगल का रहस्यमयी रक्षक
- E17. रक्तदंत का प्रकोप
- E18. जंगल की अग्नि परीक्षा
- E19. साहस की लौ
- E20. वह दिन जब आर्य ने इंकार किया