
Sarhad-E-Ishq
एक सरहद, एक वादा, एक मोहब्बत. 1947 की उस खौफनाक रात, जब मुल्क दो हिस्सों में बंटा, वीर और नूर की दुनिया भी बिखर गई. रसूलपुर की मिट्टी में पले-बढ़े....
एक सरहद, एक वादा, एक मोहब्बत. 1947 की उस खौफनाक रात, जब मुल्क दो हिस्सों में बंटा, वीर और नूर की दुनिया भी बिखर गई. रसूलपुर की मिट्टी में पले-बढ़े इन दो दिलों की दोस्ती मोहब्बत में बदली, जिसने मजहब की हर दीवार तोड़ दी. लेकिन बंटवारे की उस रात, जब ट्रेन की सीटी बजी और भीड़ का सैलाब उमड़ा, वीर का हाथ नूर के हाथ से छूट गया – हमेशा के लिए. सालों बाद, वीर अपनी पहचान बदलकर उस मुल्क में कदम रखता है जिसे कभी दुश्मन समझा था. हर गली में शक, हर चेहरे पर खतरा, हर सांस में मौत का डर – फिर भी उसका एक ही मकसद है: अपनी अधूरी मोहब्बत को ढूंढना और उसे सुरक्षित वापस वतन लाना. लेकिन नूर तक पहुंचना सिर्फ शुरुआत है. असली जंग तो तब शुरू होती है जब पहचान की परतें उखड़ती हैं, शक का दायरा बढ़ता है, और हर मुलाकात एक नया खतरा लेकर आती है. क्या नूर अपने एहसानों से बड़ा अपने पुराने प्यार पर भरोसा कर पाएगी? क्या वीर अपनी नकली पहचान के पीछे छुपकर अपनी असली मोहब्बत को बचा पाएगा, या सच सामने आते ही दोनों की जान खतरे में पड़ जाएगी? यह सिर्फ एक Partition love story नहीं है – यह प्यार, पहचान और झूठ की जानलेवा कीमत की कहानी है. यहां सरहद सिर्फ एक लकीर नहीं, कहानी का सबसे बड़ा विलेन है, जिसने एक दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया, पर दो दिलों को कभी अलग नहीं कर पाया.
- E1. प्रोमो
- E2. पहली मुलाक़ात
- E3. साँसों की डोर
- E4. वक़्त का इशारा
- E5. टूटा यक़ीन
- E6. साज़िश का बीज
- E7. पहली दस्तक
- E8. एक अटूट कसम
- E9. एक फ़ैसला, एक सरहद
- E10. मेले में एक चाल
- E11. अनकहा इज़हार
- E12. बरसात में इश्क़ का इकरार
- E13. जब दो दिल एक हुए
- E14. इश्क़ और इंतकाम
- E15. इश्क़ के ख़िलाफ़ पंचायत
- E16. इश्क़ की जीत, सरहद का डर
- E17. तेरे नाम हुई मेरी शाम
- E18. इश्क़ की निशानी, जुदाई की आहट
- E19. मोहब्बत और मजबूरी
- E20. जुदाई से पहले एक मुलाक़ात