
Heaven of Lightning King
चौधरी परिवार का आलीशान विला आज रात रोशनी से इस तरह जगमगा रहा था, मानो आसमान के सारे सितारे इसी जमीन पर उतर आए हों। विला के भीतर का माहौल....
चौधरी परिवार का आलीशान विला आज रात रोशनी से इस तरह जगमगा रहा था, मानो आसमान के सारे सितारे इसी जमीन पर उतर आए हों। विला के भीतर का माहौल बेहद शानदार और चकाचौंध से भरा था। चारों तरफ शहर के नामी-गिरामी लोग, महंगे सूट और खूबसूरत साड़ियों में सजे मेहमान मौजूद थे। हवा में महंगे परफ्यूम और लजीज पकवानों की खुशबू तैर रही थी। आज की रात कोई आम रात नहीं थी, बल्कि चौधरी परिवार की मुखिया और पूरे खानदान की मालिक, सत्तर साल की मानद बुजुर्ग महिला अनन्या चौधरी का जन्मदिन था। पूरे हॉल में उत्सव का माहौल था और अनन्या चौधरी एक ऊंचे सिंहासन नुमा सोफे पर बैठीं मुस्कुरा रही थीं। उनके चेहरे पर अपने रसूख और दौलत का साफ घमंड देखा जा सकता था। उनके इर्द-गिर्द उनके पोते, पोतियां और दामाद खड़े थे, जो उन्हें खुश करने के लिए एक से बढ़कर एक महंगे और नायाब तोहफे दे रहे थे। तभी चौधरी परिवार का एक पोता आगे बढ़ा और हाथ जोड़कर बोला, दादी मां, मुझे पता था कि आपको चाय का कितना शौक है, इसलिए मैं आपके लिए विशेष रूप से मंगवाई गई यह सौ साल पुरानी हिमालयन गोल्ड टी ब्रिक लाया हूं। इसकी कीमत पूरे पांच लाख रुपये है। यह मेरी तरफ से आपके जन्मदिन का एक छोटा सा नजराना है। अनन्या चौधरी ने उस कीमती चाय के डिब्बे को देखा और उनके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान तैर गई। वे खुशी से चहक उठीं। अभी मेहमान इस तोहफे की तारीफ कर ही रहे थे कि तभी दूसरा पोता-दामाद आगे आया। वह कोई और नहीं, शहर के रसूखदार कपूर परिवार का चश्मा-ओ-चिराग करण कपूर था, जिसकी सगाई अनन्या की छोटी पोती कियारा से हुई थी। करण ने बड़े ही गर्व के साथ एक मखमली बक्सा खोला और कहा, दादी मां, मुझे पता है कि आपकी आस्था भगवान में कितनी गहरी है। इसलिए मैं आपके लिए शुद्ध सफेद संगमरमर और बेशकीमती पत्थरों से तराशी हुई भगवान बुद्ध की यह अत्यंत दुर्लभ मूर्ति लाया हूं, जिसकी कीमत पूरे सात लाख रुपये है। ओल्ड मिसेज अनन्या चौधरी ने जब उस चमकती हुई मूर्ति को देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे जोर से हंस पड़ीं और बोलीं, अरे वाह करण बेटा! तुमने तो मेरा दिल ही जीत लिया। पूरा चौधरी परिवार दादी मां को इस कदर खुश देखकर निहाल हो रहा था। विला का माहौल पूरी तरह से तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। हर कोई एक-दूसरे को अपनी दौलत का प्रदर्शन करने में लगा हुआ था। लेकिन इसी हंसते-खेलते, चकाचौंध से भरे और अमीर माहौल में अचानक एक ऐसी आवाज गूंजी, जिसने पूरे हॉल के सन्नाटे को खींच लिया। वह आवाज थी अनन्या चौधरी के सबसे बड़े दामाद अर्जुन की। अर्जुन ने भीड़ को चीरते हुए आगे कदम बढ़ाया। उसके कपड़े बेहद साधारण, लगभग मामूली थे, जो उस आलीशान पार्टी के माहौल में पूरी तरह से बेमेल लग रहे थे। अर्जुन ने बेहद हिचकिचाहट, लाचारी और मजबूरी भरे स्वर में कहा, दादी मां... क्या आप मुझे दस लाख रुपये उधार दे सकती हैं? अनाथालय की काव्या मौसी, जिन्होंने मुझे बचपन में पाला था, उन्हें गंभीर बीमारी हो गई है। उनकी दोनों किडनियां खराब हैं और इस वक्त वे जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं। उनके इलाज के लिए तुरंत पैसों की जरूरत है।
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- E2. कबीर का कबीर
- E3. पहचान का खेल और नया सवेरा
- E4. शहंशाह का पहला वार
- E5. अरब का टेंडर और महा-चुनौती
- E6. दांव और दगाबाजी
- E7. कपटी मददगार और अदृश्य सम्राट
- E8. साठ करोड़ का सौदा और अनसुलझा रहस्य
- E9. सच का धमाका और उड़ते होश
- E10. शर्त से मुकरने का अंजाम
- E11. दादी का पासा और नया इम्तिहान
- E12. पीठ में छुरा और साजिश का आगाज
- E13. असली रसूख और रुपयों का सैलाब
- E14. रसूख का खेल
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- E16. असली शहंशाह
- E17. औकात का फैसला
- E18. झूठा इल्जाम और गहराता सस्पेंस
- E19. बर्बादी का तांडव
- E20. धोखेबाज़ों का तमाशा