
Ramayan: Ek Mahagatha
कहते हैं, जब अधर्म का अंधकार अपने चरम पर पहुँच जाता है, तो धर्म को स्वयं नारायण के रूप में जन्म लेना पड़ता है। ये कहानी है मर्यादा पुरुषोत्तम राम....
कहते हैं, जब अधर्म का अंधकार अपने चरम पर पहुँच जाता है, तो धर्म को स्वयं नारायण के रूप में जन्म लेना पड़ता है। ये कहानी है मर्यादा पुरुषोत्तम राम की, जो अपने पिता के एक वचन की लाज रखने के लिए, चौदह वर्षों के कठिन वनवास पर निकल चुके हैं। अब उनके लिए उनका धर्म और उनकी पत्नी सीता ही सब कुछ हैं। और वही त्रिलोक-विजयी, दशानन रावण, जिसका फिलहाल एक ही मकसद है अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का प्रतिशोध लेना। उसके लिए वो किसी भी हद तक जा सकता है, यहाँ तक कि स्वयं जगत-जननी सीता का हरण करने तक। मगर जब एक मनुष्य का धर्म, त्रिलोक के सबसे शक्तिशाली राक्षस के अहंकार से टकराएगा, तो इस पृथ्वी के भाग्य पर कौन सा विधान राज करेगा, धर्म या अधर्म? जानने के लिए सुनिए "रामायण: एक महागाथा", सिर्फ Pocket FM पर।