
सच्चाई की वापसी
जब दुनिया तुम्हें कमज़ोर समझती है, तब तुम वो देखना सीख जाते हो जो ताक़तवर लोग नहीं देख पाते। “नीचे से ऊपर” अर्जुन यादव की कहानी है — एक साधारण सा....
जब दुनिया तुम्हें कमज़ोर समझती है, तब तुम वो देखना सीख जाते हो जो ताक़तवर लोग नहीं देख पाते। “नीचे से ऊपर” अर्जुन यादव की कहानी है — एक साधारण सा पुलिस सिपाही, सिस्टम के सबसे निचले पायदान पर तैनात। थाने में हर कोई उसका मज़ाक उड़ाता है, अफ़सर उसे नज़रअंदाज़ करते हैं, और पूरी व्यवस्था उसे एक बेकार मोहरा समझती है। लेकिन कोई नहीं जानता कि उसकी चुप्पी के पीछे एक पैनी नज़र और एक जागता हुआ दिमाग़ छुपा है। दुर्घटनाओं के नाम पर की गई हत्याएँ, बंद की गई फ़ाइलें, ग़ायब किए गए सबूत — इन सबके पीछे एक ऐसा जाल है जिसमें नेता, माफ़िया, बिल्डर और पुलिस तक जुड़े हुए हैं। जब विभाग खुद सच दबाने लगे और ताक़तवर लोग बेगुनाहों की लाशों पर सुकून से सो रहे हों, तब अर्जुन उस साज़िश से टकराता है जिसका सच सामने लाना उसकी नौकरी, उसकी पहचान और उसकी जान — सब कुछ छीन सकता है। हर एपिसोड में खुलता है एक नया राज़। हर सच के साथ कसती जाती है मौत की रस्सी। हर क़दम अर्जुन को ले जाता है उस जंग की ओर जहाँ सामने है पूरा सिस्टम और अकेला है वह। यह किसी जन्मजात नायक की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है जो कमज़ोर समझे जाने के बाद भी सच से मुंह नहीं मोड़ता। क्या सच सामने आएगा? या फिर एक बार और ताक़त जीत जाएगी?
- E1. सिस्टम की परछाइयाँ
- E2. अंधेरे के सौदागर
- E3. ज़हर और ज़मीर
- E4. चक्रव्यूह की पहली दीवार
- E5. राख से जन्मा प्रतिशोध
- E6. चक्रव्यूह का विध्वंस
- E7. नया शहर, पुराना ज़हर
- E8. देवताओं का पतन
- E9. धर्मयुद्ध का अंतिम अध्याय
- E10. साये का उदय
- E11. हावड़ा का हुंकार
- E12. बर्फ़ की आग
- E13. शून्य का उदय
- E14. मायाजाल का शिकारी
- E15. अल्पाइन का साया
- E16. मुखौटों का अंत
- E17. खंडहरों की गूँज
- E18. सच जब भीड़ बन जाता है
- E19. विश्वासघात की प्रतिध्वनि
- E20. सिंहासन का साया
Imran Ansari — 5/5 — 4M ago
achi kahani hai police ke
Rajendra Singh — 5/5 — 5M ago
acha likh lete hai lekhak babu..