
रूह - अतीत की आहट
यह गांव की एक देहाती युवा लड़की प्रिया की कहानी है जो शहर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा है। वह पढ़ने लिखने में मेधावी तथा अंधविश्वासों को न मानने....
यह गांव की एक देहाती युवा लड़की प्रिया की कहानी है जो शहर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा है। वह पढ़ने लिखने में मेधावी तथा अंधविश्वासों को न मानने वाली लड़की होती है पर एक घटना सेे उसका जीवन बदल जाता है। उसके जीवन में तब एक नया मोड़ आता है जब वह एक रात अकेले शमशान के रास्ते से अपने गांव जा रही होती है वहां उसका सामना एक ऐसी भयंकर रूह से होता है जो पूर्व जन्म से उसका प्रेमी है प्रिया के वहां जाने से वह अपनी सैकड़ो सालों की निंद्रा से बाहर आ जाता है और उसे अपने साथ ले जाना चाहता है। शमशान के एक अघोरी तांत्रिक की मदद से प्रिया कैसे उस ब्रह्मराक्षस से सामना करती है? कैसे वह अपने पूर्व जन्म के बारे में जानती है? क्या था सुंदरगढ़ का रहस्य? चंद्रलेखा ने पंडित भुनेश्वरनाथ को क्या धोखा दिया था और कैसे बना भुवनेश्वर नाथ एक ब्रह्मराक्षस? प्रिया का दोस्त रोहित जो उसे मन ही मन चाहता था क्या उस भयंकर ब्रह्मराक्षस के चंगुल में फंसी प्रिया उसे मिल पाती है? क्या था प्रिया की मां सुधा का अतीत। इन्हीं सबके ताने-बाने बुनती हुई है यह कहानी। यहां डर भी है, दोस्ती भी है और प्यार भी है।एक के बाद एक खुलते नये रहस्य कहानी को दिलचस्प बनाते हैं।