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Doosra Main

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|1
Suspense & Thriller

अध्याय: एक कमरे में हल्की पीली रोशनी जल रही थी. पंखा धीमी आवाज में घूम रहा था. बाहर बारिश हो रही थी, और खिडकी के शीशे पर गिरती बूंदें किसी बेचैन....

अध्याय: एक कमरे में हल्की पीली रोशनी जल रही थी. पंखा धीमी आवाज में घूम रहा था. बाहर बारिश हो रही थी, और खिडकी के शीशे पर गिरती बूंदें किसी बेचैन दिल की तरह लगातार टकरा रही थीं. राघव दत्ता ने अपनी आँखें मलते हुए लैपटॉप बंद किया. आज फिर देर हो गई थी. वो पिछले छह महीनों से ठीक से सो नहीं पाया था. उसकी नौकरी, EMI, माँ की दवाई, और मीरा के साथ बढती दूरी. सब मिलकर उसे अंदर से खोखला कर रहे थे. टेबल पर रखी डिजिटल घडी की लाल रोशनी दो: सोलह दिखा रही थी. उसी वक्त उसका मोबाइल हल्का- सा कंपन करने लगा. Unknown Number. राघव ने स्क्रीन को कुछ सेकंड तक घूरा. इतनी रात को? पहले उसने सोचा काट दे. लेकिन Call लगातार बजती रही. उसने एक गहरी सांस ली और Call उठा लिया. Hello? कुछ सेकंड तक सिर्फ खामोशी. फिर. किसी की धीमी सांसों की आवाज. राघव झुंझलाया — कौन है? बोलिए. दूसरी तरफ से शांत लेकिन भारी आवाज आई— फोन मत काटना. उस आवाज में कुछ अजीब था. जैसे वो बहुत दूर से आ रही हो. जैसे किसी सुरंग के अंदर से. आप कौन हैं? राघव ने पूछा. कुछ पल चुप्पी. फिर आवाज बोली— मैं तुम हूँ. दस दिन बाद का. राघव के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई. अच्छा? और मैं प्रधानमंत्री हूँ. आवाज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. कल दोपहर तीन बजकर चालीस मिनट पर तुम्हारे ऑफिस में शॉर्ट सर्किट होगा. सर्वर Room में आग लगेगी. कोई मरेगा नहीं. लेकिन तुम्हारी फाइलें जल जाएंगी. राघव की मुस्कान धीरे- धीरे गायब हो गई. ये कोई घटिया मजाक है? मजाक नहीं है. और ये तो बस शुरुआत है. अगर तुम सच में मैं हो. तो बताओ अभी मैं क्या पहन रहा हूँ? कुछ सेकंड खामोशी रही. फिर आवाज बोली— ग्रे टी- शर्ट. दाईं बाजू पर हल्का- सा दाग. जो तुमने अभी तक धोया नहीं. राघव के हाथ से फोन लगभग छूट गया. उसने अपनी बाजू की तरफ देखा. सच में दाग था. उसने कभी मीरा को भी नहीं बताया था. ये. ये कैसे. आवाज शांत रही. समय बहुत कम है. मेरी बात ध्यान से सुनो. जो मैं कहूँ, वो करो. वरना दस दिन बाद तुम्हारी जिंदगी खत्म हो जाएगी. क्या मतलब खत्म? तुम जेल में होगे. और तुमने एक खून किया होगा. फोन cut गया. कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया. राघव का दिल जोर- जोर से धडक रहा था. उसने तुरंत Call लॉग खोला. Unknown Number। लेकिन duration शून्य seconds। जैसे Call connect ही नहीं हुआ. उसने दोबारा नंबर पर Call करने की कोशिश की. Number does not exist. राघव कुछ देर तक खाली दीवार को देखता रहा. Stress है. बस stress. वो खुद को समझाने लगा. लेकिन उसके हाथ अभी भी कांप रहे थे. अगला दिन. दोपहर तीन बजकर सैंतीस मिनट ऑफिस में सामान्य हलचल थी. राघव अपनी डेस्क पर बैठा फाइल देख रहा था. उसकी नजर बार- बार घडी पर जा रही थी. तीन: उनतालीस उसने खुद से कहा— कुछ नहीं होगा. तीन: चालीस अचानक एक जोरदार आवाज. चिंगारियाँ. सर्वर Room से धुआँ निकलने लगा. किसी ने चिल्लाया— Fire! Fire! लोग भागने लगे. राघव कुर्सी से खडा हो गया. उसका दिमाग सुन्न था. कुछ ही मिनटों में छोटी- सी आग फैल गई. फायर एक्सटिंग्विशर से काबू पा लिया गया. कोई घायल नहीं हुआ. लेकिन जब वो सर्वर Room के अंदर गया. उसकी सारी investigation फाइलें जल चुकी थीं. वो वहीं खडा रह गया. उसे रात की आवाज याद आई— तुम्हारी फाइलें जल जाएंगी. उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. रात. सुबह दो बजकर सोलह मिनट राघव बिस्तर पर बैठा था. मीरा उसकी बगल में सो रही थी. लेकिन उसकी आँखों में नींद नहीं थी. दो: सत्रह फोन फिर बजा. इस बार उसने बिना देर किए उठा लिया. तुमने देखा. ये सवाल नहीं था. एक बयान था. तुम कौन हो? राघव की आवाज काँप रही थी. मैं तुम हूँ. दस दिन आगे का. और अगर तुम मेरी बात नहीं मानोगे, तो सब खत्म हो जाएगा. तुम चाहते क्या हो? कल ऑफिस में एक आदमी आएगा. नाम — अमन खन्ना. उसे warn करना. Kiss बारे में? उसका एक्सीडेंट होगा. अगर तुमने उसे रोका नहीं. वो मर जाएगा. और अगर मैंने रोका? तो कहानी बदल जाएगी. फोन cut गया. राघव ने गहरी सांस ली. अब ये सिर्फ coincidence नहीं था. ये कुछ और था. अगले दिन. अमन खन्ना ऑफिस आया. राघव उसे देखता रहा. करीब बत्तीस साल का, मुस्कुराता हुआ, नई जॉइनिंग. राघव उसके पास गया. आज बाइक से मत जाना. अमन हँसा— क्यों? बारिश है इसलिए? बस मत जाना. अमन ने कंधे उचकाए. शाम छह बजे. अमन ऑफिस से निकला. राघव पीछे- पीछे गया. अमन बाइक स्टार्ट करने ही वाला था कि राघव चिल्लाया— रुको! उसी पल एक ट्रक तेजी से निकला. अगर अमन आगे बढता. तो सीधा टक्कर होती. अमन ने डर से राघव की तरफ देखा. तुम्हें कैसे पता? राघव के पास जवाब नहीं था. उसने बस इतना कहा— कभी- कभ