
राजनीति की ज़ंजीरें
राजनीति की ज़ंजीर 'राजनीति की ज़ंजीर' बिहार के रौनिया ज़िले की एक ऐसी कहानी है, जहाँ प्यार, विश्वासघात और सत्ता का नशा एक ही ज़हरीली डोर से बँधे हैं. कहानी की शुरुआत....
राजनीति की ज़ंजीर 'राजनीति की ज़ंजीर' बिहार के रौनिया ज़िले की एक ऐसी कहानी है, जहाँ प्यार, विश्वासघात और सत्ता का नशा एक ही ज़हरीली डोर से बँधे हैं. कहानी की शुरुआत तब होती है, जब ज़िले के बाहुबली नेता बड़का बाबू की निर्मम हत्या हो जाती है. उनकी सीधी-सादी, घरेलू पत्नी कमला देवी (हमारी 'रानी') को मजबूरी में राजनीति के दलदल में उतरना पड़ता है. शुरुआत में वह भले ही हाथ जोड़कर खड़ी होती है, लेकिन जैसे ही विरोधी बाहुबली ददन सिंह (हमारा 'कालीन भैया') उसके बेटे को धमकी देता है, कमला देवी के अंदर की 'रंगबाज़' जाग उठती है. वह ठान लेती है कि अब बदला घर के चूल्हे से नहीं, बल्कि राजनीति की गद्दी से लिया जाएगा. कमला, अपने पति के दोस्त और ईमानदार पुलिस ऑफिसर अजय के साथ मिलकर ददन सिंह के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलती है. लेकिन, उसे जल्द ही पता चलता है कि राजनीति की इस लड़ाई में दुश्मन सिर्फ़ ददन सिंह नहीं है, बल्कि उसके अपने सबसे भरोसेमंद आदमी, उसके मामा 'गुरुजी' ही असली गद्दार हैं, जो दोनों पक्षों से खेल रहे हैं. गद्दार मामा को हटाकर, कमला अकेली पड़ जाती है. अजय को भी उसकी मदद करने के कारण वर्दी से हाथ धोना पड़ता है. अब ददन सिंह ने अपना सबसे खतरनाक मास्टरमाइंड 'चाचा' को मैदान में उतारा है, जो चुनावी धांधली और खून-खराबे से रौनिया पर कब्ज़ा करना चाहता है. यह कहानी है ममता और सत्ता के बीच फंसे एक महिला की, जो बिहारी दबंगई और तेज़ दिमाग से, ददन सिंह और उसकी काली राजनीति की ज़ंजीरों को तोड़कर रौनिया की असली मालिकन बनने का सफ़र तय करती है. हर मोड़ में एक नया षड्यंत्र, एक नया प्यार का मोड़, और एक ऐसा सस्पेंस है जो कमला के रस्ते में आते है
- E1. गद्दी खाली मेहरारू भारी
- E2. पायलटवा और पंचायती
- E3. ददन का दांव
- E4. शराब, शबाब और शिकार
- E5. गद्दारी का हिसाब
- E6. प्रेस कॉन्फ्रेंस का ज़हर
- E7. दोस्ती का आखिरी कॉल
- E8. चाचा' का आगमन
- E9. पुलिस में जासूस
- E10. मुखबिर का जाल
- E11. अजय का वार
- E12. मास्टर चार्ट का रहस्य
- E13. गोली गवाह और गद्दारी
- E14. दिल्ली का जाल, गवाह की सुरक्षा
- E15. चाचा' का अंतिम दांव
- E16. शपथ ग्रहण
- E17. क़ानून का ड्रामा
- E18. अलमारी का राज़
- E19. विदेशी शिकारगाह और मोहरे की मौत
- E20. राजनयिक जाल, डॉन का दांव और