
Buddha
इतिहास जब पुराना हो जाता है तो लोग उसे पुराण कहते हैं हमारे पुराणों में प्राचीन भारत का इतिहास है युगों युगों से चली आ रही मनुष्य सृष्टि के कल्याण....
इतिहास जब पुराना हो जाता है तो लोग उसे पुराण कहते हैं हमारे पुराणों में प्राचीन भारत का इतिहास है युगों युगों से चली आ रही मनुष्य सृष्टि के कल्याण हे हर काल में किसी ना किसी युग पुरुष ने जन्म लिया त्रेता युग में राम ने मर्यादा पुरुषोत्तम का संदेश दिया समाज के चरित्र का निर्माण किया द्वापर युग में कृष्ण ने गीता के द्वारा कर्म का सिद्धांत समझाया और धर्म की संस्थापन की पर समय चलते धर्म के नाम पर अधर्म बढ़ा असत्य अराजकता असमानता अस्पृश्यता अर्थ सिद्धि और अंध श्रद्धा का पाखंड चारों ओर फैलने लगा मनुष्य भयभीत हो अज्ञान के अंधकार में भटकने लगा इसी अंधकार को दूर करने पुन एक युग पुरुष जन्म लेने वाला था और इस बार उस युग पुरुष का नाम था [संगीत] बुध महाभारत युद्ध पश्चात कई युग बीत चुके थे उस महायुद्ध की परछाई ने भारतवर्ष को कई हिस्सों में बांट दिया था ढाई हजार वर्ष पूर्व उत्तर पूर्व भारत में मगध और वैशाली के समीप एक संघ राज्य था कपिल वस्तु उस समय कपिल वस्तु पर शाक्य कुल के पराक्रमी क्षत्रिय सूर्यवंशी राजा शुद्धोधन का शासन था [संगीत] [संगीत] गोपाल लगता है कोई खुशी का संदेश है हा लश का वरना य गगन ढोल क्यों [संगीत] बचे एक और से आए राजा दूजी ओर से पांडव भील युद्ध हुआ रण में घमासान अंत में जीते जो थे [संगीत] वीर वो कौन है वो महाराज शुद्धोधन [प्रशंसा] छोटी महादेवी छोटी महादेवी हम तुझे ही आवाज देने वाले थे लसिका या गगन ढोल खुशी के समाचार है महादेवी महाराज शुद्धोधन पांडव भीलो की प्रजाति को युद्ध में पराजित कर कपिल वस्तु लौट रहे हैं ईश्वर ने हमारी मनोकामना पूरी कर दी क्या यह समाचार महादेवी महामाया तक पहुंचा नहीं वो इस समय अपने कक्ष में नहीं है ठीक है तू ग में अदान का प्रबंध कर यह खुशी का समाचार हम स्वयं अपनी बड़ी बहन को [प्रशंसा] [संगीत] देंगे सा सा सा म सा सा सा सा सा पकड़ लिया पकड़ लिया पकड़ लिया [संगीत] दत बाकी बच्चे कहां गए बच्चे कौन से बच्चे य मैं अकेला [संगीत] हूं यय क्या हो रहा है हम अब मैं जाऊ कहां अपनी मां के पास [संगीत] पर आपने मुझे एक वचन दिया था ना हां वो तो मैं भूल ही गया तो फिर बोलो बिना बोले मैं आपको जाने नहीं दूंगी बोलो बोलो ना पहले अपनी आंखें तो बंद कीजिए [संगीत] [प्रशंसा] मा दीदी दीदी तुमने श्रंगार नहीं किया अभ तक श्रंगार वो किसलिए यह गगन ढोल सुने नहीं तुमने हए समाचार लाई है महाराज विजय होकर लौट रहे हैं पूरे कपिल वस्तु में आनंद का गुलाल छाया है प्रजापति यह तो बड़ी खुशी की बात है तो तो जाकर उनके स्वागत की तैयारी कर और आने पर इतनी सेवा करना उनकी इतनी खुशी देना उन्हे कि युद्ध भूमि की सारी थकान मिट जाए और तुम [संगीत] खुशी के मौके पर पाच का चेहरा नहीं देखते प्रजापति दीदी मेरा चेहरा देखते ही संतान ना होने का मेरा यह दुख महाराज का दुख बन जाएगा और मैं उनके दुख का कारण नहीं बनना चाहती दीदी तुमने महाराज से मेरा विवाह इसलिए कराया था ताकि महाराज को संतान सुख प्राप्त हो और कपिल वस्तु को उसका उत्तराधिकारी किंतु चार वर्ष हो गए मैं भी महाराज को संतान का सुख नहीं दे पा तो बांच तो मैं भी हुई ना ना ना प्रजापति ना मैं अपनी आशा के मुंह से अशुभ सुनना नहीं चाहती और मैं भी तुम्हें इस हाल में नहीं देखना चाहती इस वक्त हम दोनों का कर्तव्य है कि हम मिल के महाराज का स्वागत करें और उनकी खुशी को दो गुना कर द क्या चाहते हो तुम बस इतना कि जब महाराज आए तो तुम उनका स्वागत पूरे 16 श्रृंगार के साथ करो और महाराज बस तुम्हे ही देखते रह जाए महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय महाराज की ज महाराज की जय महाराज की जय महाराज की जय की जय महाराज की जय सार स सागर सार स साग [संगीत] [प्रशंसा] म कैसे हो अनुज दुनो दन आपका आशीर्वाद है भाई महाराज और राज्य में भी सब कुछ कुशल मंगल है तुम हो तो अमंगल हो भी कैसे सकते तुम ही हो जिसके कंधे पर मैं कपिल वस्तु का भार सौंपकर निसंदेह युद्ध पर जा सकता हूं आइए रुकिए हम आपको प्रवेश करने नहीं देंगे तुम मुझे प्रवेश क्यों नहीं करने दोगे पहले आप मेरे लिए क्या लाए हैं वो दीजिए तभी हम आपको भीर आने देंगे मैं राजा होकर सबसे कर वसूल लेता हूं और यह राजा देवदत्त मुझसे कर ले रहा यह रहा आपका उपहार आप मुझसे यु के बिना भीतर नहीं जा सकते मेरी ही तलवार और मुझ पर प्रहार [संगीत] [हंसी] ठीक अपति [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] चले महाराज की जय महाराज की महाराज [संगीत] [प्रशंसा] की बहुत पीड़ा हो रही है नहीं मामाया यह पीड़ा उस पीड़ा के आगे कुछ नहीं जो भाग्य ने हमें दिया है कहने को तो सब कुछ है हमारे पास परंतु देखा जाए तो कुछ भी नहीं दो बियाह करने के पश्चात भी हम नि संतान है