
Aladdin
हजारों सालों से जिस रात का इंतजार था, वो शैतान की काली रात आ चुकी है। एक खूंखार जादूगर, मलिका, ने दुनिया के बड़े-बड़े बादशाहों को मिट्टी में मिला दिया....
हजारों सालों से जिस रात का इंतजार था, वो शैतान की काली रात आ चुकी है। एक खूंखार जादूगर, मलिका, ने दुनिया के बड़े-बड़े बादशाहों को मिट्टी में मिला दिया है, और अब उसकी नज़र बगदाद के सिंहासन पर है। लेकिन इसी शहर की गलियों में एक ऐसा नाम गूंज रहा है जिसे पकड़ना ग्यारह मुल्कों की पुलिस के लिए भी नामुमकिन है - अलादीन। एक चोर, एक शहजादा, जो अपनी अम्मी के लिए कुछ भी कर सकता है और जिसका दिल शहजादी यास्मीन के लिए धड़कता है। यास्मीन, जो सोने के पिंजरे में कैद एक खूबसूरत परिंदा है, आज़ादी की तलाश में महल से बाहर निकल पड़ती है। जब अलादीन और यास्मीन की मुलाकात होती है, तो उन्हें नहीं पता कि वज़ीर-ए-आला की काली नज़र सिर्फ यास्मीन पर नहीं, बल्कि पूरे बगदाद के तख्त पर है। क्या ये दोनों सिपाही और वज़ीर के खूंखार मंसूबों से बच पाएंगे, या उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा है?
- E1. पत्थर की मलिका और बगदाद का काला चोर
- E2. वज़ीर की बात सच हो रही थी
- E3. अगर चिराग मेरे हाथ नहीं आया तो क्या हुआ
- E4. अगर वज़ीर के हाथ वो चिराग लग गया, तो पल
- E5. वज़ीर उस जादुई चिराग को हासिल करके पूरे