
मृत्युंजय मणि
जहाँ मृत्यु अंत नहीं, बल्कि मोक्ष का द्वार बन जाती है… जहाँ हर चिता की राख में एक नई कहानी जन्म लेती है… वही है काशी की पवित्र भूमि — मणिकर्णिका घाट। सदियों....
जहाँ मृत्यु अंत नहीं, बल्कि मोक्ष का द्वार बन जाती है… जहाँ हर चिता की राख में एक नई कहानी जन्म लेती है… वही है काशी की पवित्र भूमि — मणिकर्णिका घाट। सदियों पहले माता पार्वती का दिव्य मणि यहीं गिरा था, जिसमें छिपी है अमरत्व की शक्ति… और सृष्टि के संतुलन का रहस्य। इस मणि की रक्षा करता आया है एक रहस्यमयी वंश — मृत्युंजय वंश, जिसका हर रक्षक समय-समय पर पुनर्जन्म लेकर इसे सुरक्षित रखता है। अब… वह मणि फिर से जाग उठी है। और उसके साथ जागा है — शिवा। एक साधारण आधुनिक युवक… जिसे अपने अतीत, अपनी शक्तियों और अपनी असली पहचान का कोई ज्ञान नहीं। लेकिन जैसे-जैसे अंधकारमय शक्तियाँ काशी की घाटों से लेकर विदेशी भूमि तक फैलने लगती हैं, वैसे-वैसे शिवा के भीतर सोई हुई दिव्य शक्ति जागने लगती है। क्या शिवा अपने भाग्य को स्वीकार कर पाएगा? क्या वह मणि की रक्षा कर पाएगा — या वही बनेगा उसके विनाश का कारण? और क्या सच में मृत्यु… अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है? रहस्य, रोमांच, पुनर्जन्म और दिव्यता से भरी इस महागाथा को जानने के लिए — सुनें “मणिकर्णिका : मृत्युंजय मणि” केवल Pocket FM पर!
- E1. जहाँ मणि गिरी थी
- E2. गंगा का रहस्य
- E3. मनिकर्णिका का द्वार
- E4. अंधकार का संकेत
- E5. मणिकर्णिका का चिह्न।
- E6. मृत्यु का रहस्य
- E7. मणि को काशी लौटाओ
- E8. स्वर्ण द्वार का उद्घाटन
- E9. मृत्यु के पार का जीवन
- E10. कालांतक की दहलीज़
- E11. अमृत और अंधकार
- E12. कालचक्र का संकेत
- E13. आत्मा का आईना
- E14. Naya Janm नया जन्म
- E15. सत्य लोक का द्वार
- E16. Shiva अग्नि से अमृत तक
- E17. The Ganga अंधकार की वापसी
- E18. The Kalika संघम त्रय का प्रहार
- E19. Bilupt Rakshak नीली ज्वाला का पुनर्जन्म
- E20. Manikarnika नया रक्षक