
तख्तः रहस्मयी साये
“तख़्त” — एक ऐसी रहस्यमयी फ़ैंटेसी कहानी, जहाँ हकीकत और सपनों की सीमाएँ धुंधली पड़ जाती हैं। कहानी दो दोस्तों आरव और गौरव की है । जो अनजाने में एक ऐसे विरान तख़्त....
“तख़्त” — एक ऐसी रहस्यमयी फ़ैंटेसी कहानी, जहाँ हकीकत और सपनों की सीमाएँ धुंधली पड़ जाती हैं। कहानी दो दोस्तों आरव और गौरव की है । जो अनजाने में एक ऐसे विरान तख़्त के रहस्य में उलझ जाते हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि वो सिर्फ़ पत्थर का नहीं, बल्कि खून, डर और अधूरी क़िस्मतों से बना है। हर रात आरव को वही सपना आता है — एक सुनसान महल, सन्नाटे में गूंजती परछाइयाँ, और उस तख़्त पर कोई… जो धुंध में बैठा उनकी ओर देख रहा है। जैसे-जैसे दोनों सच्चाई के करीब पहुँचते हैं, वैसे-वैसे हकीकत और भ्रम की रेखा मिटती जाती है। हर जवाब एक नया सवाल बन जाता है, हर कदम उन्हें उस तख़्त के और पास ले जाता है — जहाँ उनका भाग्य, उनका भय, और शायद उनकी आख़िरी सांस इंतज़ार कर रही है। “तख़्त” — क्योंकि हर राज़ की एक क़ीमत होती है।