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मृत्युजयी

मृत्युजयी

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Fantasy

"जिस रात उसके पिता मारे गए, उस रात एक अग्नि जन्मी… जो सदियों से बुझी नहीं थी। वह लड़का—अद्वेय दिव्यवंशी। वह ग्रंथ—अर्धाग्नि। वह शक्ति—मृत्युजयी की। राज्य उसका दुश्मन। दुनिया उसका शिकारी। भाग्य उसका परीक्षण। और वह खुद… अपनी ही अग्नि....

"जिस रात उसके पिता मारे गए, उस रात एक अग्नि जन्मी… जो सदियों से बुझी नहीं थी। वह लड़का—अद्वेय दिव्यवंशी। वह ग्रंथ—अर्धाग्नि। वह शक्ति—मृत्युजयी की। राज्य उसका दुश्मन। दुनिया उसका शिकारी। भाग्य उसका परीक्षण। और वह खुद… अपनी ही अग्नि का कैदी। यह कहानी है उसके लौटने की… उसके जलने की… और उसके उठने की। यह है— मृत्युजयी।" --- दिव्यवंशी वंश—वह वंश जिसकी अग्नि कभी देवताओं का हथियार हुआ करती थी। पर अब वह वंश समाप्त माना जाता है। तब तक… जब तक एक सोलह वर्षीय राजकुमार अद्वेय अपने पिता का मृत शरीर आग में जलते नहीं देख लेता। उस रात— अधिराज नाम का चाचा अपने ही भाई की हत्या कर देता है और अद्वेय के सिर पर इनाम रख देता है। लेकिन पिता के अंतिम स्पर्श में अद्वेय को एक ऐसा ग्रंथ मिलता है जो साधारण मनुष्यों के लिए अंधा है, पर अद्वेय के लिए जीवित। यह अर्धाग्नि ग्रंथ उसके भीतर छिपी अग्नि को जगाता है— ऐसी अग्नि, जिससे दुनिया डरती थी… क्योंकि यह वही अग्नि है जिसने कभी मृत्युजयी को जन्म दिया था। विद्यापीठ के गुरु उसे पहचानते हैं… या उससे डरते हैं। कुछ उसे स्वीकारना चाहते हैं, कुछ उसे नष्ट करना। और कुछ… उसे हथियार बनाना। अद्वेय की यात्रा उसे ले जाती है— महाशक्ति विद्यापीठ की दिव्य भूमि तक अग्नि-दैत्य और वंश-शाप की परीक्षा तक साथियों और शत्रुओं के बीच चुनाव तक और उस नियति तक जिसे वह चाहता नहीं… पर उससे भाग नहीं सकता। क्योंकि अंतिम भविष्यवाणी कहती है— “मृत्युजयी लौटेगा। अग्नि फिर उठेगी। और उसके सामने देवता भी झुकेंगे… या मिटेंगे।”