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Dard-E- ISHQ

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5
|1
Romance

आराधना के पिता अपनी बेटी से बेइंतहा प्यार करते थे। इसीलिए जब उनकी बेटी ने अपने सबसे बड़े दुश्मन के बेटे, आरव से प्यार किया, तो उन्होंने अपनी नफरत के आगे....

आराधना के पिता अपनी बेटी से बेइंतहा प्यार करते थे। इसीलिए जब उनकी बेटी ने अपने सबसे बड़े दुश्मन के बेटे, आरव से प्यार किया, तो उन्होंने अपनी नफरत के आगे बेटी की खुशी को चुना। आराधना और आरव बचपन से एक-दूसरे के साथ थे। साथ खेलते-खेलते कब दोस्ती प्यार में बदल गई, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। आरव, जो बचपन से ही पढ़ाई में सबसे आगे था, बहादुर था, समझदार था और हर किसी की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता था। लेकिन आराधना के लिए वह सिर्फ कॉलेज का सबसे लोकप्रिय और हैंडसम लड़का नहीं था। वह उसका सबसे करीबी दोस्त, उसका सहारा और उसका प्यार था। दोनों के परिवारों के बीच सालों पुरानी दुश्मनी थी। फिर भी कॉलेज में हर कोई उनके रिश्ते को जानता था। लोग उनकी मोहब्बत की मिसाल देते थे और मानते थे कि शायद यही दो लोग अपने परिवारों की पुरानी दुश्मनी को खत्म करके एक नई शुरुआत करेंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। क्योंकि इसी कहानी में एक ऐसा इंसान था, जो प्यार को ताकत नहीं, कमजोरी मानता था। ऋषि। उसका मानना था कि इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कोई अपना होता है। जिस दिन किसी इंसान के पास खोने के लिए कोई खास बन जाता है, उसी दिन उसकी बर्बादी शुरू हो जाती है। और फिर आया वह दिन, जब आराधना और आरव की सगाई होने वाली थी। हॉल रोशनी से जगमगा रहा था। दोनों परिवार सामने खड़े थे। आराधना की आंखों में अपने आने वाले कल के सपने थे। आरव ने जैसे ही उसकी उंगली में अंगूठी पहनाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया... अचानक सारी लाइटें बंद हो गईं। एक पल में पूरा हॉल अंधेरे में डूब गया। फिर लाइटें वापस आईं। लेकिन सब कुछ वैसा नहीं था जैसा कुछ पल पहले था। आरव वहां नहीं था। उसकी जगह आराधना के सामने खड़ा था ऋषि। आराधना कुछ समझ पाती, उससे पहले ऋषि ने उसकी उंगली में सगाई की अंगूठी पहना दी। आराधना की सांसें थम गईं। उसने घबराकर अपने आसपास देखा। उसके पिता... उसका परिवार... हर कोई बंदूकों के निशाने पर था। उसके सामने सिर्फ दो रास्ते थे। ऋषि को स्वीकार करना... या फिर अपने परिवार को खो देना। आराधना ने कांपते हाथों से ऋषि की अंगूठी स्वीकार कर ली। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। ऋषि ने अपने आदमियों को आदेश दिया, आरव को वापस लेकर आओ। कुछ ही देर बाद दो गार्ड आरव को लेकर वहां पहुंचे। वह बेहोश था। आराधना उसे देखते ही उसकी तरफ बढ़ने लगी। लेकिन तभी किसी ने उसकी कलाई पकड़कर उसे रोक दिया। ऋषि। उसने आराधना को आगे बढ़ने नहीं दिया और अपने आदमियों को आरव को होश में लाने का आदेश दिया। फिर वह उसके बिल्कुल करीब झुका और धीमी आवाज में सिर्फ इतना कहा... अब तुम मेरी हो। आराधना की दुनिया उसी एक पल में बदल चुकी थी। जिस लड़के को वह अपना जीवनसाथी समझ रही थी, उसकी जगह अब उसका सबसे बड़ा खतरा खड़ा था। लेकिन ऋषि ने उसे सिर्फ एक बात समझाई। अब वह किसी भी दूसरे लड़के से दूर रहेगी। दोस्त हो, पुराना मंगेतर हो या कोई और, उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर उसने आराधना की उंगली में पहनी उस अंगूठी को छुआ। और उसे एहसास कराया कि जब तक वह अंगूठी उसकी उंगली में है, तब तक उसकी जिंदगी बाहर से सामान्य दिखाई दे सकती है। लेकिन जिस दिन वह अंगूठी उसकी उंगली से उतरी... उस दिन उसकी जिंदगी उस अंधेरी दुनिया में प्रवेश कर जाएगी, जहां से वापस लौटना शायद उसके लिए इतना आसान नहीं होगा। एक तरफ बचपन का प्यार आरव... दूसरी तरफ अपनी शर्तों पर जीने वाला ऋषि... और इनके बीच फंसी आराधना। क्या आराधना कभी इस रिश्ते से बाहर निकल पाएगी? क्या आरव उसे वापस पाने के लिए ऋषि के सामने खड़ा होगा? और सबसे बड़ा सवाल... जिस दुश्मनी ने दो परिवारों को सालों तक एक-दूसरे के खिलाफ रखा, उसके पीछे आखिर ऐसा कौन सा सच छिपा है, जिसने ऋषि को आराधना की जिंदगी बदल देने पर मजबूर कर दिया? क्योंकि यह सिर्फ एक अधूरी मोहब्बत की कहानी नहीं है। यह उस रिश्ते की कहानी है, जहां प्यार और नफरत के बीच की सीमा धीरे-धीरे मिटने वाली है।