
Yakshini Kaalchakra
एक जलते हुए मैदान में, राख के ढेर से एक नवजात शिशु मिलता है, जिसकी कलाई पर पांच काली लकीरें हैं – एक ऐसा रहस्य जो तारा को 21 साल....
एक जलते हुए मैदान में, राख के ढेर से एक नवजात शिशु मिलता है, जिसकी कलाई पर पांच काली लकीरें हैं – एक ऐसा रहस्य जो तारा को 21 साल तक डराता रहा है। वेद, जिसे तारा ने पाला है, अपनी माँ यामिनी और पिता युग की मौत का सच जानने के लिए एक रहस्यमयी कैसेट टेप को सुलझाने की कोशिश करता है। लेकिन यह टेप सिर्फ आवाज़ें नहीं, बल्कि अतीत के एक ऐसे दरवाजे को खोलता है जहाँ समय खुद उलझ जाता है। जब वेद को पता चलता है कि वह उस रात पैदा ही नहीं हुआ था, बल्कि उसे उस रात से अलग किया गया था, तो उसे अपने अस्तित्व पर ही सवाल उठने लगते हैं। क्या वह अपने माता-पिता की मौत का बदला ले पाएगा, या खुद 'कालचक्र' का हिस्सा बन जाएगा? क्या वह उस रात के सच को बदल पाएगा, या खुद उस सच में खो जाएगा?
- E1. राख के बाद
- E2. दरवाज़े के बाहर कौन है
- E3. लौटती हुई आवाज़
- E4. दो साँसों का नाम
- E5. आग के उस पार
- E6. मेरी बेटी को घर आने दो
- E7. सूरज से पहले की घंटी
- E8. आईने के कुएँ में
- E9. पहली आग का घर
- E10. तीसरी साँस का दरवाज़ा
- E11. पहली आग की रात
- E12. नीले मनके के बिना
- E13. कुएँ की लौटी हुई बच्ची
- E14. मीनू को बुलाने वाली औरत
- E15. गौरीगाँव का बंद स्कूल
- E16. आईने में दो बच्चियाँ
- E17. जिस नाम को माँ भूल गई
- E18. बारिश वाली कॉपी
- E19. नीले मनके का रास्ता
- E20. पानी ने ऊपर की दुनिया की हर आवाज़ को निग