
Devdhar Ka Shrap
बहुत समय पहले हिमालय की तलहटी में बसा था दिव्य और समृद्ध राज्य — देवधर, जहाँ हरियाली, नदियाँ और मंदिरों की गूंज स्वर्ग का आभास कराती थी। वर्षों की तपस्या....
बहुत समय पहले हिमालय की तलहटी में बसा था दिव्य और समृद्ध राज्य — देवधर, जहाँ हरियाली, नदियाँ और मंदिरों की गूंज स्वर्ग का आभास कराती थी। वर्षों की तपस्या के बाद राजा अरिंदम और रानी मीनल को संतान रूप में राजकुमार आदित्य प्राप्त हुआ। पर उसके जन्म के साथ ही प्रकृति में कुछ अनहोखा घटा — देवी की मूर्ति की आँख से गिरा तेल, घड़ी की अतिरिक्त घंटी, और एक सर्प जैसी परछाईं। एक प्राचीन शिलालेख के अनुसार, आदित्य सौवां वंशज है, जिससे एक श्रापित द्वार फिर खुलेगा। जब रानी के पुत्र ने अनजाने में "तारु" नाम लिया, एक ऐसा नाम जो किसी भूली कथा में था, तो रानी कांप उठीं। आचार्य रत्नेश ने चेताया — यह बालक देवधर का रक्षक भी बन सकता है और विनाशक भी। क्या रानी सच बताएगी? क्या आदित्य श्राप का अंत करेगा या इतिहास दोहराएगा? जानने के लिए सुनिए, "Devdhar Ka Shrap" सिर्फ "Pocket FM" पर।
- E1. सौवें वंशज का जनम
- E2. अतीत की परछाइयां
- E3. पहला संकेत
- E4. प्राचीन द्वार का खुलना
- E5. श्राप की जड़
- E6. तीसरी आंख का खुलना
- E7. नागलोक की ओर
- E8. रक्तपिपासु की वापसी
- E9. ऋषि अचिरतन का श्राप
- E10. ब्रह्मरक्षसों की पहली परीक्षा
- E11. कालिमा की नज़र