
Avinash Kaal Ka Yodha
एक प्राचीन भविष्यवाणी सच होने वाली है। जब एक नवजात शिशु के माथे पर दहकता सूर्य-तिलक चमक उठता है, तो सदियों से सोया एक महातेज जागृत होता है। प्रतापगढ़ की....
एक प्राचीन भविष्यवाणी सच होने वाली है। जब एक नवजात शिशु के माथे पर दहकता सूर्य-तिलक चमक उठता है, तो सदियों से सोया एक महातेज जागृत होता है। प्रतापगढ़ की शापित हवेली में जन्मा यह बालक, अविनाश, कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि स्वयं ब्रह्मांड का महायोद्धा है, जिसका जन्म तीनों लोकों को हिला देने वाले एक भयंकर धर्म-युद्ध के लिए हुआ है। एक ओर पाताल के सबसे बड़े असुर तामराज कालशूल का बहुमुखी साया आसमान में मंडरा रहा है, तो दूसरी ओर तांत्रिक कालिका की लाल आँखें इस नवजात को मिटाने पर तुली हैं। क्या दिनेश तिवारी अपने बेटे को इस आसन्न खतरे से बचा पाएगा, या यह दिव्य बालक अपने जन्म के साथ ही एक ऐसे युद्ध में धकेल दिया जाएगा जहाँ से कोई वापसी नहीं?
- E1. जिसके जन्म से कांप उठा अंधेरा
- E2. पहली रात का पहला वार
- E3. सोलह वर्षों का अंधेरा
- E4. मायावी अरण्य की पहली परीक्षा
- E5. पहली शक्ति की पुकार
- E6. पहली साधना की अग्नि
- E7. मोह की अग्नि
- E8. नागझिरी का रहस्य
- E9. मोहिनी का फरेब और रुद्र का अपहरण
- E10. प्राचीन शिव मंदिर
- E11. खूनी महासंग्राम व मायावी प्रकाश द्वार
- E12. कंकाल वन का रास्ता
- E13. कंकाल वन की पहली परीक्षा
- E14. कंकाल वन का शिकारी
- E15. कंकाल-वन का दूसरा द्वार
- E16. वज्र-दंशकों का चक्रव्यूह
- E17. दो सेनापतियों का अंत
- E18. दिव्य 'अदृश्य-कोष'
- E19. पार्थिव-वज्र धनुष
- E20. अल्फा-सम्राट का अंत
roshi — 5/5 — 1M ago
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