
संहार का ऋण (SanharKaRin)
मणिकर्णिका घाट पर जहाँ हर दिन सैकड़ों आत्माएँ विदा होती हैं, वहाँ अचानक चिता की अग्नि बुझ जाती है, गंगा का प्रवाह थम जाता है, और एक प्राचीन ताड़पत्र पर....
मणिकर्णिका घाट पर जहाँ हर दिन सैकड़ों आत्माएँ विदा होती हैं, वहाँ अचानक चिता की अग्नि बुझ जाती है, गंगा का प्रवाह थम जाता है, और एक प्राचीन ताड़पत्र पर उभरते हैं रहस्यमयी शब्द। अर्णव, जिसे लोग श्मशान वाला लड़का कहते हैं, हमेशा से मृत्यु के करीब रहा है, लेकिन आज अग्नि ने उसे पहचान लिया है। जब एक छोटी बच्ची अपने मृत पिता का हाथ छोड़ने से इनकार करती है और अर्णव उसे दिलासा देता है, तो उसे नहीं पता कि यह साधारण पल उसके जीवन को हमेशा के लिए बदल देगा। एक अदृश्य शक्ति ने अग्नि को शांत कर दिया है, और गंगा की लहरें भी ठहर गई हैं, मानो कोई प्राचीन रहस्य जाग उठा हो। क्या यह सिर्फ एक अपशकुन है, या अर्णव का अतीत और भविष्य किसी अनजाने ऋण से बंधा है? जब ताड़पत्र पर लिखा आता है, 'अर्णव, अगला नाम तुम्हारा है', तो उसे पता चलता है कि संहार का ऋण अब उसे चुकाना होगा।