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हारे को श्याम मिले

हारे को श्याम मिले

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Mythology

तीस साल की ज़िंदगी, एक थैले में सिमटी, और एक सवाल जो सूरज को अंदर से खाए जा रहा था: अब कहाँ जाऊँ? पिता के जाने के बाद घर की....

तीस साल की ज़िंदगी, एक थैले में सिमटी, और एक सवाल जो सूरज को अंदर से खाए जा रहा था: अब कहाँ जाऊँ? पिता के जाने के बाद घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ सूरज ने उठाईं, अपने आँसू पीकर परिवार को संभाला, भाई-बहन की शादी की, पर बदले में उसे मिला सिर्फ़ धोखा और बेघर होने का दर्द। जब अपने ही पराये हो जाएँ, और हर रास्ता बंद लगे, तब एक रेलवे स्टेशन की बेंच पर एक रहस्यमयी बुज़ुर्ग मिलता है। वो बुज़ुर्ग, जिसकी आँखों में दुनिया की सारी शांति है, सूरज को एक तस्वीर दिखाता है – खाटू श्याम जी की। क्या यह सिर्फ़ एक तस्वीर है, या सूरज की टूटी हुई उम्मीदों को जोड़ने वाला कोई दैवीय संकेत? क्या सच में हारे हुए को श्याम मिलते हैं, या यह सिर्फ़ एक और भ्रम है?