
हमारी प्यारी माँ सा
जैसलमेर के आलीशान सूर्यगढ़ होटल में शादी की शहनाइयां बज रही हैं, हर तरफ खुशियों का माहौल है. तभी एक गाड़ी होटल में दाखिल होती है और उसमें से निकलती....
जैसलमेर के आलीशान सूर्यगढ़ होटल में शादी की शहनाइयां बज रही हैं, हर तरफ खुशियों का माहौल है. तभी एक गाड़ी होटल में दाखिल होती है और उसमें से निकलती है गौरी, जिसकी आँखों में तारों सी चमक और चेहरे पर बेपनाह उत्साह है. वह इतनी तेज़ी से भागती है, मानो किसी दौड़ में हो, हर बाधा से बचते हुए, जैसे उसे हर हाल में जीतना हो. उसकी माँ यशोदा उसे रोकने की कोशिश करती है, लेकिन गौरी रुकने का नाम नहीं लेती. अचानक, वह एक वेटर से टकराकर ज़मीन पर गिर जाती है, और सभी की निगाहें उस पर टिक जाती हैं. लेकिन गौरी किसी के उठाने का इंतज़ार नहीं करती, खुद उठती है और फिर भागने लगती है, जब तक कि वह उस शख्स को नहीं देख लेती जिससे मिलने के लिए वह इतनी बेताब थी. कौन है वह शख्स जिसके लिए गौरी ने खुशियों से भरे इस माहौल में भी ऐसी दीवानगी दिखाई? और क्या यह मुलाकात सिर्फ एक इत्तेफाक है या किसी गहरी कहानी की शुरुआत?