
श्रीमद्भगवद्गीता सार
कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में, जहाँ लाखों की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हैं, इतिहास का सबसे महान धनुर्धर अर्जुन अपने ही बंधु-बांधवों को देख कर काँप उठता है। उसके हाथ से....
कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में, जहाँ लाखों की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हैं, इतिहास का सबसे महान धनुर्धर अर्जुन अपने ही बंधु-बांधवों को देख कर काँप उठता है। उसके हाथ से गांडीव छूटने लगता है, गला सूख जाता है और आँखों से आँसू बहने लगते हैं। यह कायरता नहीं, बल्कि एक ऐसा मोह है जो उसे अपने कर्तव्य से विमुख कर रहा है। जब सही और गलत की सीमाएँ धुंधली पड़ जाएँ, जब अपना ही मन पलायन का रास्ता दिखाए, तब क्या करें? क्या यह सिर्फ अर्जुन का विषाद है, या हर उस इंसान की पुकार जो जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है? यह गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और जीवन-प्रबंधन का विज्ञान है, जो आपको अपने भीतर के कुरुक्षेत्र में विजय दिलाएगा।