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बेताल पीठ पर सवार

बेताल पीठ पर सवार

368 PlaysSuspense & Thriller

कहानी का नाम: बेताल पीठ पर सवार लेखिका: रीटा माधव और अनन्या का यह प्रेम केवल दो दिलों का मिलन नहीं है, बल्कि यह उस अदृश्य और खौफनाक बोझ के खिलाफ एक....

कहानी का नाम: बेताल पीठ पर सवार लेखिका: रीटा माधव और अनन्या का यह प्रेम केवल दो दिलों का मिलन नहीं है, बल्कि यह उस अदृश्य और खौफनाक बोझ के खिलाफ एक रूहानी बगावत है जो राजा विक्रमादित्य की तरह उनकी पीठ पर 'बेताल' बनकर सवार था। जब चारों तरफ मुनीम जी की काली परछाइयां और पाताल की वह दहकती हुई ज्वाला मौत बनकर मंडरा रही होती है, तब उनका यह रिश्ता उस बेताल के हर एक वार को चुनौती देता है। माधव की थकी हुई और झुर्रियों से भरी पीठ पर सदियों के उस पाप और बहीखाते का जो शाप लादा गया था, अनन्या उसी पीठ का ढाल बनकर उसके साथ खड़ी होती है। उस प्राचीन, वीरान और खौफनाक खंडहर मंदिर के गर्भगृह में, जहाँ हर सांस पर मौत का पहरा था, माधव का अनन्या का हाथ थामना और अनन्या का यह कहना कि "मुझे भूला हुआ माधव मंजूर है, लेकिन इस मुनीम का गुलाम माधव नहीं"—इस बात का प्रतीक था कि उन्होंने अपनी पीठ पर लदे उस बेताल रूपी अभिशाप को अपने प्रेम और अटूट संकल्प के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। उनका यह रोमांस और समर्पण किसी साधारण दुनिया का नहीं, बल्कि उस पारलौकिक चक्रव्यूह को चीरकर अपनी आत्मा को आजाद कराने वाली उस महा-अग्नि का नाम है, जिसके आगे पाताल की ज्वाला भी ठंडी पड़ जाती है।