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झूठा सिंदूर

झूठा सिंदूर

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क्या होता है जब जिस इंसान पर आपने अपनी पूरी ज़िंदगी न्योछावर कर दी, वही आपकी पीठ में खंजर घोंप दे? सिया कपूर शहर की एक बेहद प्रतिभाशाली और स्वाभिमानी....

क्या होता है जब जिस इंसान पर आपने अपनी पूरी ज़िंदगी न्योछावर कर दी, वही आपकी पीठ में खंजर घोंप दे? सिया कपूर शहर की एक बेहद प्रतिभाशाली और स्वाभिमानी आर्किटेक्ट है। पेरिस और लंदन से पचास करोड़ का इंटरनेशनल प्रोजेक्ट क्रैक करके जब वह अपने मंगेतर रोहन मेहता के केबिन में पहुँचती है, तो उसकी दुनिया बिखर जाती है। रोहन किसी और के साथ नहीं, बल्कि सिया की अपनी ही शातिर बड़ी बहन रिया कपूर की बाहों में था। रोहन ने न सिर्फ चार साल के प्यार का सौदा किया, बल्कि कपूर खानदान की अस्सी प्रतिशत जायदाद और बिजनेस पर कब्जा करने के लिए रिया से सगाई का ऐलान कर दिया। सिया के अपने माता-पिता ने भी दौलत और रुतबे के लालच में रिया का साथ दिया और सिया को बेसहारा छोड़कर घर से बेदखल कर दिया। पूरे परिवार में अगर कोई सिया का सच्चा हमदर्द था, तो वो थीं उसकी बीमार और बेबस दादी माँ। अपनों के इस घिनौने धोखे, अपमान और ज़िल्लत की आग में झुलसती सिया टूटने के बजाय इंतकाम की राह चुनती है। अपनी दोस्त की एक गलतफहमी के चलते सिया को लगता है कि बार के वीआईपी लाउंज में बैठा खामोश और रुतबेदार अजनबी रोहन का बेहद रईस कज़न सिद्धार्थ है, जिसके सामने रोहन का पूरा परिवार झुकता है। बदले की धुन में सिया सीधे उस अजनबी के पास जाकर शादी का प्रस्ताव रख देती है। लेकिन यहाँ से शुरू होता है तकदीर का सबसे बड़ा खेल। वह अजनबी रोहन का कज़न सिद्धार्थ नहीं, बल्कि शहर के सबसे ताकतवर और गुप्त अरबपति साम्राज्य 'सिंघानिया घराने' का असली वारिस आरव सिंघानिया है। आरव, जो अपने पारिवारिक अतीत और धोखों की वजह से बर्फ की तरह ठंडा और बेरुखा है, अपने दादाजी से किया एक पुराना पारिवारिक वादा निभाने के लिए सिया के साथ एक साल की कॉन्ट्रैक्ट मैरिज पर दस्तखत कर देता है। एक ही छत के नीचे शुरू होती है दो ज़ख्मी और स्वाभिमानी रूहों की कहानी। एक तरफ सिया है, जो बिना किसी का सहारा लिए अपनी काबिलियत के दम पर कॉर्पोरेट जगत में दोबारा खड़ी होती है और अपने दुश्मनों को एक-एक करके धूल चटाती है। दूसरी तरफ आरव है, जिसका बर्फ जैसा दिल सिया की सादगी और उसके हुनर को देखकर धीरे-धीरे पिघलने लगता है। जब भी सिया पर कोई मुसीबत आती है, आरव एक खामोश और बेरहम ढाल बनकर उसके आगे खड़ा हो जाता है। पर क्या होगा जब सिया के सामने यह सच आएगा कि जिस इंसान से उसने सिर्फ बदले के लिए शादी की थी, वह असल में कोई और है? क्या यह कागज़ी शादी सच्चे प्यार में बदलेगी या नफरत और धोखे की आग सब कुछ राख कर देगी? धोखे, बदले, साज़िश और धीमे-धीमे सुलगते इश्क़ की एक बेमिसाल दास्तान—**'बदले की शादी'**।