
घर की ज़ीनत
लखनऊ के एक शरीफ़, पुराने घराने की रौनक है ज़ीनत, जिसने अपने सयानेपन और मीठी ज़बान से सबका दिल जीत लिया है। घर के बड़े-बुज़ुर्गों की दुआओं और पति अयाज़....
लखनऊ के एक शरीफ़, पुराने घराने की रौनक है ज़ीनत, जिसने अपने सयानेपन और मीठी ज़बान से सबका दिल जीत लिया है। घर के बड़े-बुज़ुर्गों की दुआओं और पति अयाज़ के प्यार से उसकी दुनिया महक रही है, जहाँ सुबह की शुरुआत अज़ान और उसके हाथों की कड़क चाय से होती है। लेकिन इस सुकून भरे घर में एक तूफ़ान आने वाला है, जिसकी आहट से ज़ीनत बेख़बर है। अयाज़ की छोटी बहन शबाना, शहर के बड़े कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर लौट रही है, जिसके खुले विचार और आधुनिक सोच इस पारंपरिक घर के कायदे-कानूनों से बिल्कुल मेल नहीं खाते। क्या ज़ीनत अपने बेमिसाल तहज़ीब और समझदारी से इस बदलते माहौल में घर की खुशियों और बड़ों की इज़्ज़त को बचा पाएगी, जब उसके अपने संस्कार ही दाँव पर लग जाएँगे?