
काशी का प्रहरी
काशी के घाट पर रणधीर नकली रुद्राक्ष और गंगाजल बेचकर गुज़ारा करता है, लेकिन एक दिन उसकी मुलाकात एक रहस्यमयी सूटधारी से होती है। यह अजनबी उसे एक ऐसे काम....
काशी के घाट पर रणधीर नकली रुद्राक्ष और गंगाजल बेचकर गुज़ारा करता है, लेकिन एक दिन उसकी मुलाकात एक रहस्यमयी सूटधारी से होती है। यह अजनबी उसे एक ऐसे काम का प्रस्ताव देता है, जो उसकी गरीबी हमेशा के लिए मिटा सकता है। रणधीर को कुछ पुराने दस्तावेज़ चुराने होंगे, जो शहर के कुछ गरीब दुकानदारों के पास हैं और जिनकी कीमत उन्हें खुद भी नहीं पता। यह प्रस्ताव रणधीर के अंदर के नैतिक द्वंद्व को जगा देता है – क्या वह अपने सिद्धांतों को बेचकर अमीर बनेगा, या ईमानदारी के रास्ते पर चलता रहेगा? लेकिन जब उसे पता चलता है कि उस सूटधारी ने पहले भी एक लड़के को इसी काम पर लगाया था, जो फिर कभी वापस नहीं आया, तो रणधीर के मन में डर घर कर जाता है। क्या यह सिर्फ एक चोरी है, या रणधीर किसी गहरे, खतरनाक जाल में फंसने वाला है?