
The Kashi Chapter
काशी, एक ऐसी नगरी जहाँ जीवन और मृत्यु एक ही धागे में पिरोये गए हैं, जहाँ घाटों पर जलती चिताओं का धुंआ मोक्ष का मार्ग दिखाता है और संकरी गलियां....
काशी, एक ऐसी नगरी जहाँ जीवन और मृत्यु एक ही धागे में पिरोये गए हैं, जहाँ घाटों पर जलती चिताओं का धुंआ मोक्ष का मार्ग दिखाता है और संकरी गलियां हज़ारों सालों के रहस्य अपने सीने में दबाए बैठी हैं। यह कहानी डॉ. कबीर की है, जो काशी के एक सरकारी अस्पताल में एक थका हुआ, लेकिन समर्पित इमरजेंसी रूम डॉक्टर है। डॉ. कबीर की ज़िंदगी एक ही रात में पूरी तरह बदल जाती है। इसकी शुरुआत एक अजीब मरीज़ से होती है - एक डरावना, रहस्यमयी अघोरी, जो एक पुरानी इमारत की छत से गिर गया है। मरते-मरते, वह अघोरी डॉ. कबीर की कलाई को एक अलौकिक ताकत से जकड़ लेता है। उसकी पकड़ इतनी भयानक होती है कि उसके लंबे, काले, कोयले की तरह चमकते नाखून कबीर की खाल में गहरे धंस जाते हैं। अघोरी के अंतिम शब्द, "उसे ढूँढ लिया गया है," डॉ. कबीर के दिल में दहशत भर देते हैं और अघोरी दम तोड़ देता है। इसके कुछ समय बाद, कबीर अस्पताल से बाहर निकलता है। वह बारिश में एक गुरुकुल (अनाथालय) की ओर जाने के लिए एक ऑटो लेता है, जिसे वह हमेशा सहारा देता है। तभी, एक तेज़ रफ़्तार से आती ट्रक से ऑटो की भीषण टक्कर होती है और कबीर की मौत हो जाती है। लेकिन यह उसका अंत नहीं था। कबीर को भयावह एहसास होता है कि उसकी चेतना अब भी जीवित है - वह अपने ही जड़, बेजान शरीर के भीतर क़ैद है। वह बोल नहीं सकता, हिल नहीं सकता, लेकिन वह अपनी ही मौत का मूक गवाह बन जाता है। उसके सहकर्मी उसे मृत घोषित कर देते हैं, उसे मुदाघर (Morgue) के खौफनाक अँधेरे में रख दिया जाता है और उसे असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ती है जब उसे चिता पर ज़िंदा ही जला दिया जाता है। यही यातना उसे वैतरणी नदी के किनारे ले जाती है, जो यमलोक (Hell) का एक रूप है। यहाँ, वह "लाल दुल्हन" चुड़ैलों के एक समूह को देखकर सम्मोहित हो जाता है, जो खून से सने लाल जोड़े पहने हुए हैं। लेकिन यह आकर्षण एक भयानक धोखा साबित होता है जब एक डरावनी, बिना चेहरे वाली पिशाचिनी उसे नदी में खींचने और निगल जाने की कोशिश करती है। कबीर अपने नाखूनों में बह रही उसी रहस्यमयी शक्ति के कारण बच पाता है - वही काले नाखून, जो उस अघोरी के थे। जैसे ही वे पिशाचिनी को छूते हैं, वह जल उठती है और कबीर किसी तरह वहाँ से भाग निकलता है। उसे वापस काशी की धरती पर फेंक दिया जाता है - लेकिन अब वह एक कमज़ोर, बुझती हुई आत्मा है, जिसे कोई देख या छू नहीं सकता। उसका अस्तित्व ख़त्म होने लगता है, तो वह किसी सहारे की तलाश में भटकता है। उसकी मुक्ति रोहन के रूप में सामने आती है, जो एक किताबों की दुकान (Library) में मृत पड़ा होता है। कबीर अपनी आत्मा को रोहन के शरीर में मिला देता है और एक नई, जटिल ज़िंदगी की शुरुआत करता है। वह रोहन के रूप में आँखें खोलता है - एक असफल, "नल्ला" घर-जमाई, जिसे अपनी ससुराल में कोई इज़्ज़त नहीं दी जाती। उसकी पत्नी, डॉ. अनन्या सिंघानिया, बेहद खूबसूरत है, पर भावनाओं में ठंडी और दूरी बनाए रखने वाली है। उसकी ससुराल अहंकार से भरी हुई है और हर मौके पर उसे नीचा दिखाती है। रोहन (कबीर) का पहला सामना उसी आदमी से होता है जिसने रोहन की हत्या की थी। कातिल लायब्रेरी में लौटता है और अपना जुर्म कबूल करता है, लेकिन फिर शक में डूबकर रोहन पर हमला कर देता है। कबीर के रहस्यमयी नाखून हमलावर को निष्क्रय कर देते हैं और उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाता है। इसके बाद, कबीर (रोहन) डॉ. अनन्या के साथ अस्पताल पहुँचता है, जहाँ वह एक प्यारी-सी छोटी बच्ची, रूही, की आत्मा से मिलता है, जो एक स्कूल बस हादसे में मारी गई थी। रूही को यह नहीं पता कि वह मर चुकी है। अपने डॉक्टर वाले स्वभाव के कारण, कबीर अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता है और रूही की आत्मा को उसके शरीर में वापस धकेल देता है, जिससे वह चमत्कारिक रूप से ज़िंदा हो जाती है। लेकिन इसका पलटवार कबीर पर असहनीय दर्द और नींद न आने की बीमारी (Insomnia) के रूप में होता है। उसे पता लगता है कि वह अब सामान्य इंसानी खाना भी नहीं खा सकता। उसे दर्द और नींद न आने से राहत सिर्फ एक ही जगह मिलती है - मुदाघर की सुन्न कर देने वाली ठंड। इसी अजीब खोज के चलते वह लायब्रेरी के लिए एक पुरानी आइस-क्रीम वाली डीप-फ्रीज़र खरीद लेता है और उसमें सोने लगता है। कबीर के रिश्ते और भी पेचीदा होते चले जाते हैं। एक बेहद असहज पारिवारिक भोजन (Dinner), हालात को और बदतर बना देता है, जहाँ कबीर खुद को रोक नहीं पाता और सारा खाना उगल देता है। इस दौरान यह भी सामने आता है कि अनन्या की शादी रोहन से जबरदस्ती कराई गई थी। उनका बेडरूम एक दर्दनाक राज़ छुपाए हुए है - अनन्या ज़मीन पर सोती हैं, जो उनके रिश्ते में दूरी की गवाही देता है।
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.
E1. मौत का बुलावा और एक नई शुरुआत
E2. अघोरी का साया और एक अजनबी पत्नी
E3. जीवन का श्राप और मौत का बिस्तर
E4. राख का निवाला और एक खौफनाक परछाई
E5. यमलोक का न्याय और एक दोस्त का विश्वासघात
E6. डिजिटल तंत्र और महा विनाशकारी प्रहार


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