
Shri Ramcharit Manas
श्री गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'श्री रामचरितमानस' भारतीय संस्कृति का वह अनमोल रत्न है, जो सदियों से मानव जाति को धर्म और नैतिकता का मार्ग दिखा रहा है। अवधी....
श्री गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'श्री रामचरितमानस' भारतीय संस्कृति का वह अनमोल रत्न है, जो सदियों से मानव जाति को धर्म और नैतिकता का मार्ग दिखा रहा है। अवधी भाषा में रचित यह महाकाव्य केवल एक कथा नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की एक संपूर्ण संहिता है। **कथा के सात सोपान (सात कांड)** 1. **बालकांड:** कथा का आरंभ वंदना और भगवान शिव-पार्वती प्रसंग से होता है। इसके बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम का जन्म, उनका बाल्यकाल, ऋषि विश्वामित्र के साथ गमन, ताड़का वध और जनकपुर में शिव धनुष तोड़कर माता सीता से विवाह की गौरवशाली गाथा का वर्णन है। 2. **अयोध्या कांड:** इसे मानस का हृदय कहा जाता है। यहाँ राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच माता कैकेयी के दो वरदान पूरी अयोध्या को शोक में डुबो देते हैं। श्री राम का सहर्ष वन गमन, केवट प्रसंग, दशरथ मरण और भरत का अद्भुत त्याग इस भाग की मुख्य विशेषताएं हैं। 3. **अरण्य कांड:** वनवास के दौरान दंडक वन में ऋषियों का उद्धार और शूर्पणखा के प्रसंग से युद्ध की नींव पड़ती है। मायावी स्वर्ण मृग की सहायता से रावण द्वारा माता सीता का हरण और विलाप करते हुए श्री राम की शबरी से भेंट इसी कांड में वर्णित है। 4. **किष्किंधा कांड:** सीता जी की खोज में प्रभु ऋष्यमूक पर्वत पहुँचते हैं, जहाँ उनकी भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से होती है। बाली वध के उपरांत वानर सेना का संगठित होना और माता सीता की खोज में चारों दिशाओं में प्रस्थान करना इस भाग का मुख्य केंद्र है। 5. **सुंदरकांड:** यह अध्याय हनुमान जी की शक्ति और भक्ति को समर्पित है। समुद्र लांघकर लंका पहुँचना, अशोक वाटिका में सीता जी से मिलना, अक्षय कुमार का वध और लंका दहन की घटनाएं श्रोताओं में साहस और उत्साह का संचार करती हैं। 6. **लंका कांड:** भगवान राम की वानर सेना और रावण की राक्षसी सेना के बीच धर्म-अधर्म का महायुद्ध। समुद्र पर सेतु निर्माण से लेकर कुंभकरण, मेघनाद और अंततः अहंकारी रावण के वध तक की रोमांचक कथा यहाँ समाहित है। 7. **उत्तरकांड:** युद्ध विजय के पश्चात श्री राम का अयोध्या आगमन और भव्य राज्याभिषेक। यहाँ 'रामराज्य' की परिकल्पना का विस्तार है, जहाँ सुख, शांति और न्याय का वास है। अंत में तुलसीदास जी कलयुग के धर्म और भक्ति की महिमा का वर्णन करते हैं। **निष्कर्ष** श्री रामचरितमानस हमें त्याग, सेवा और अटूट भक्ति की प्रेरणा देती है। पॉकेट FM पर इस महागाथा का श्रवण आपके मन को शांति प्रदान करेगा और जीवन को एक नई दिशा देगा। आइए, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के इस पावन चरित्र में डूबकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
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E1. बालकांड* नियति का खेल
E2. सम्राट का गुप्त संताप
E3. अयोध्या में महा उत्सव
E4. बाल लीला
E5. यज्ञोपवीत संस्कार और गुरुकुल प्रस्थान
E6. गुरुकुल का तप और अजेय विद्याओं का उदय


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