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Shraapit Jalpari | श्रापित जलपरी

#8 in Horror

Shraapit Jalpari

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Horror

साल उन्नीस सौ पचास। पूर्वी पाकिस्तान का नीलगंज — इच्छामती नदी के किनारे बसा एक ऐसा गांव जहां रात होते ही पानी मौत का कुआं बन जाता है। सत्ताइस साल के....

साल उन्नीस सौ पचास। पूर्वी पाकिस्तान का नीलगंज — इच्छामती नदी के किनारे बसा एक ऐसा गांव जहां रात होते ही पानी मौत का कुआं बन जाता है। सत्ताइस साल के डॉक्टर अभिलाष के हाथों में एक धड़कता हुआ दिल है — शरीर से अलग होने के बाद भी जीवित। यह चमत्कार किसने किया? वही "जोल पिशाचिनी" जो इच्छामती नदी की गहराइयों में रहती है, जो अपने शिकार का दिल निकालकर उससे बातें करती है, जिसकी प्यास इंसानी खून से भी नहीं बुझती। जब अभिलाष सातक्षीरा गांव से भागकर इस नदी को पार करता है, तो पिशाचिनी उसके सभी साथियों को मार देती है — पर उसे जीवित छोड़ देती है। क्यों? क्या सौदा हुआ है उन दोनों के बीच? नीलगंज में अभिलाष की मुलाकात होती है बूढ़े दीनू काका से, उनकी रहस्यमयी पत्नी रंभा से, और खूंखार जमींदार बिश्वजीत घोष "सरकार" से। हर किसी के पास राज है। हर रात एक नई मौत है। और अभिलाष की नीली नसें — जोल पिशाचिनी की जंजीरें — उसे उसी की दुनिया की तरफ खींचती जा रही हैं। "मोरा-खोलोश," "जोल-बर्जन," "नीलगोंड़ी" — नीलगंज की हर परंपरा उस पिशाचिनी के खौफ से जन्मी है। पर अभिलाष एक डॉक्टर है — वो विज्ञान पर भरोसा करता है। तब तक, जब तक रहस्य उसकी अपनी हड्डियों में नहीं उतर आता। नील विद्रोह, खून के प्यासे पौधे, धड़कते हुए मुर्दा दिल, और एक ऐसा प्रेम जो मौत की सीमा पार कर जाता है — यह कहानी है जोल पिशाचिनी की। सुनिए सिर्फ Pocket FM पर।