
Re:Magic
कमरे की दीवार पर टंगा डिजिटल क्लॉक टिक-टिक नहीं कर रहा था, पर उसकी लाल रोशनी देव अरमान के सीने में किसी खंजर की तरह चुभ रही थी। साल 2050....
कमरे की दीवार पर टंगा डिजिटल क्लॉक टिक-टिक नहीं कर रहा था, पर उसकी लाल रोशनी देव अरमान के सीने में किसी खंजर की तरह चुभ रही थी। साल 2050 का न्यू दिल्ली। खिड़की के बाहर आसमान का रंग नीला नहीं, बल्कि एक अजीब सा गहरा बैंगनी था। सायरन की आवाजें दूर से गूंज रही थीं। देव अरमान ने अपने कांपते हाथों को देखा। उंगलियों के पोरों पर अभी भी हल्की नीली बिजली दौड़ रही थी। उसका गला पूरी तरह सूख चुका था। थूक निगलने पर ऐसा लगा जैसे गले में कांच के टुकड़े फंस गए हों। "हम हार गए, देव..." रोशनी इलाही की आवाज बहुत धीमी थी। देव अरमान ने पलटकर देखा। रोशनी इलाही दीवार के सहारे टिकी हुई थी। उसके सुनहरे बालों में धूल और सूखा हुआ खून जमा था। उसने अपने जख्मी पैर को दोनों हाथों से भींच रखा था, उसकी उंगलियों के जोड़ एकदम सफेद पड़ चुके थे। दर्द के मारे उसके दांत आपस में किटकिटा रहे थे। बचपन की वह हंसती-खेलती दोस्त अब एक टूटी हुई ढाल जैसी लग रही थी। देव अरमान की छाती में एक भारी-पन सा छा गया, जैसे किसी ने दस टन का पत्थर उसके फेफड़ों पर रख दिया हो। सांस लेना दूभर हो रहा था। "अभी नहीं, रोशनी। अभी सब खत्म नहीं हुआ," देव अरमान ने कहा। उसकी आवाज में दम था, पर उसकी नजरें फर्श को घूर रही थीं। वह अपनी बाईं कलाई को बार-बार मरोड़ रहा था, जहां न्यूरो-लिंक बैंड पूरी तरह जल चुका था। सबटेक्स्ट साफ था—वह खुद को धोखा दे रहा था। बाहर एक जोरदार धमाका हुआ। पूरी कंक्रीट की इमारत हिल गई। छत से सीमेंट की धूल देव अरमान के चेहरे पर गिरी। उसने आंखें बंद कर लीं। हवा में जलते हुए गंधक और बारूद की तीखी गंध भरी हुई थी। यह वही शैडो-व्यूह का ड्रैगन था, जिसने पूरे सब-कॉन्टिनेंट को श्मशान बना दिया था। तरुण कुमार और अदिति किंग्सक्राउन की लाशें नीचे मलबे में दबी थीं। देव अरमान अकेला बचा था। आखिरी क्लास-4 मैज। देव अरमान आगे बढ़ा। दरवाजा खुला। एक साया Rx-70 मैका के पीछे दिखा। वह भागा। रास्ता बंद था। सामने वही भीमकाय, धुआं उगलती हुई काली परछाईं खड़ी थी। उसकी आंखें धधकते हुए कोयले जैसी लाल थीं। ड्रैगन ने अपनी दहाड़ से हवा को चीर दिया। देव अरमान के कानों के पर्दे फटने लगे। कान के पीछे से खून की एक पतली लकीर बह निकली। उसकी हथेलियों में पसीना आ गया था, जिससे उसकी जादुई किताब 'ग्रिमॉयर' हाथ से फिसलने लगी। मौत बिल्कुल सामने थी। देव अरमान ने अपनी पूरी बची-कुची एनर्जी को समेटा। 'ब्रह्मास्त्र-मैजिक सर्कल' एक्टिवेट हुआ। उसके हाथ के चारों ओर तीन नीले और बैंगनी रंग के जादुई चक्र घूमने लगे। हवा का दबाव इतना बढ़ गया कि आसपास के पत्थर तैरने लगे। देव अरमान ने ड्रैगन के खुले हुए जबड़े की तरफ देखा। विनाश ऊर्जा का एक गोला वहां बन रहा था। "अगर इस बार नहीं... तो कभी नहीं," देव अरमान बुदबुदाया। उसने अपनी आंखें मूंद लीं। एक आखिरी, आत्मघाती मंत्र। हवा एकदम ठंडी हो गई। कमरे का तापमान अचानक माइनस डिग्री में चला गया। उसकी सांसें सफेद धुएं की तरह निकलने लगीं। चीख। धमाका। चारों तरफ सिर्फ सफेद रोशनी फैल गई। देव अरमान का शरीर हवा में उड़ा और एक मलबे से जा टकराया। उसे लगा कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है। सब कुछ शांत हो गया। सिर्फ उसकी धीमी पड़ती धड़कनें सुनाई दे रही थीं। क्या वह मर गया? अचानक, उसकी आंखें खुलीं। हवा में बारूद की गंध नहीं थी। गंधक का धुआं गायब था। इसके बजाय, उसकी नाक में ताजी पिसी हुई फिल्टर कॉफी की भीनी-भीनी खुशबू आई। खिड़की से सुबह की चमकदार, गुनगुनी धूप सीधे उसके चेहरे पर पड़ रही थी। देव अरमान ने झटके से उठने की कोशिश की, पर वह एक साफ-सुथरे, मुलायम बिस्तर पर था। उसकी छाती का वह भारी-पन गायब था। उसने अपनी हथेलियों को देखा। कोई घाव नहीं। कोई खून नहीं। उसका न्यूरो-लिंक बैंड बिल्कुल नया और चमकदार था, जिस पर हरी बत्ती ब्लिंक कर रही थी। स्क्रीन पर तारीख चमक रही थी: **16 जून, 2040**। वह दस साल पीछे आ चुका था। अपनी तबाही से ठीक दस साल पहले, जब वह हैविरॉन मैजिक एकेडमी का एक मामूली स्टूडेंट था। वह एकेडमी, जो बाहर से किसी आलीशान प्राचीन महल जैसी दिखती थी, पर उसके तैरते हुए गलियारों और दीवारों में कई अनसुलझे रहस्य दबे थे। वहाँ एलीट क्लास के छात्रों को ऊंची मैजिकल पावर्स और प्राचीन आर्टिफैक्ट्स सिखाए जाते थे, जबकि देव अरमान जैसे कॉमन बैकग्राउंड के छात्रों को सिर्फ बेसिक 'स्ट्रक्चर कोडिंग' वाले लो-लेवल जादुई चक्रों तक ही सीमित रखा जाता था। पूरी एकेडमी में उसका कोई वजूद नहीं था; लोग उसे एक कमजोर, फेल होने वाला 'क्लास-1 मैज' समझते थे, जो बस किसी तरह अपनी लाइफ काट रहा था। देव अरमान के चेहरे पर अचानक ठंडा पसीना आ गया, दिल की धड़कनें किसी ड्रम की तरह बजने लगीं। अतीत की यादों का एक धुंधला सा साया
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