
Pret Dhaba
रात के तीन बजे, जब पूरी दुनिया सो जाती है, Pret Dhaba जाग जाता है। यहाँ के ग्राहक ज़िंदा लोग नहीं होते — वो मरे हुए लोग हैं, जिनकी एक....
रात के तीन बजे, जब पूरी दुनिया सो जाती है, Pret Dhaba जाग जाता है। यहाँ के ग्राहक ज़िंदा लोग नहीं होते — वो मरे हुए लोग हैं, जिनकी एक आख़िरी भूख आज भी अधूरी है। कैसी भूख? यह राज़ अब सिर्फ़ Anuj जानता है... और यही राज़ उसे अंदर से खा रहा है। Anuj ने Pret Dhaba की नौकरी कुबूल तो कर ली, मगर अब वो एक ऐसे जाल में फँस चुका है जहाँ श्राप, चुड़ैलें और बरसों पुराने ख़ूनी राज़ अंधेरे में उसका इंतज़ार कर रहे हैं। क्या वो इस परलोक के धंधे से ज़िंदा बाहर निकल पाएगा — या यहाँ आने वाली रूहों की शर्तों में हमेशा के लिए फँस जाएगा? सुनिए Pret Dhaba, सिर्फ़ PocketFM पर।
- E1. प्रेत ढाबा
- E2. दहलीज़ के पार
- E3. रात के ग्राहक
- E4. बूढ़े का श्राप
- E5. अंजाना भूत
- E6. कपूर हवेली का काला रहस्य
- E7. कुंडली का काला राज़
- E8. खून का तावीज़
- E9. मरे हुए दोस्त की भूख
- E10. माया जाल
- E11. नशे का तूफ़ान
- E12. तंत्र-मंत्र की दुकान वाली औरत
- E13. कॉलेज के पहरेदार का चक्कर
- E14. आत्माओं का जमावड़ा
- E15. चुड़ैल का इंतक़ाम
- E16. खून का हिसाब
- E17. दादाजी की चेतावनी
- E18. तानिया हुई पागल
- E19. मौत का साया
- E20. खून की पुकार
Mahjabeen — 5/5 — 2M ago
bahut acchi kahani hai please aage likhiye