
Manikarnika
बनारस की गलियों में, जहाँ हर पल 'राम नाम सत्य है' की गूँज सुनाई देती है, वहीं राख से दोस्ती करने वाली मणिकर्णिका पली-बढ़ी है। लोग उसे 'बड़े पंडित की....
बनारस की गलियों में, जहाँ हर पल 'राम नाम सत्य है' की गूँज सुनाई देती है, वहीं राख से दोस्ती करने वाली मणिकर्णिका पली-बढ़ी है। लोग उसे 'बड़े पंडित की पागल बेटी' कहते हैं, क्योंकि उसका घर श्मशान घाट है, और उसकी दुनिया जलते शरीरों की राख में सुकून ढूँढती है। गंगा एक तरफ है, मणिकर्णिका दूसरी तरफ, और दोनों के बीच एक अजीब सी जलन है – गंगा को उसके सुकून से, और उसे गंगा के पानी से। उसे डर है कि कहीं गंगा उसे छू न ले, जैसे वो हर राख को छूती है। पर जब उसकी अपनी राख को गंगा में बहाने की बारी आती है, तो एक ऐसी कहानी शुरू होती है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। क्या श्मशान की रानी, जिसे सब पागल कहते हैं, अपनी नियति को बदल पाएगी?