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Drama

मेरा नाम अर्जुन सिंह है। और जो मैं बताने वाला हूँ वह मेरी ज़िंदगी की सबसे शर्मनाक बात भी है और सबसे ज़रूरी भी। इसलिए नहीं कि इसमें कोई बड़ा....

मेरा नाम अर्जुन सिंह है। और जो मैं बताने वाला हूँ वह मेरी ज़िंदगी की सबसे शर्मनाक बात भी है और सबसे ज़रूरी भी। इसलिए नहीं कि इसमें कोई बड़ा hero है। इसलिए कि इसमें एक आदमी है जो ग़लत रास्ते पर गया। जिसने एक रात एक ऐसा फ़ैसला किया जो उसे पता था कि ग़लत है। और जिसने उस फ़ैसले की क़ीमत हर उस इंसान से वसूली जिसे वह प्यार करता था। मेरे बाप मनोज सिंह एक cricketer थे। ज़िले के सबसे तेज़ fast bowler। जिस दिन उनका नाम selection list से हटा उस दिन कोई कारण नहीं बताया गया। कोई जवाब नहीं मिला। बस ख़त्म। मैं उस ख़ामोशी के साथ बड़ा हुआ। उस दाग़ के साथ। यह सोचते हुए कि शायद बाप में कुछ कमी थी। शायद मुझमें भी है। और जब मेरा ख़ुद का cricket career एक घुटने की चोट ने तोड़ा तो वह सोच और पक्की हो गई। हम दोनों बाप बेटे एक जैसे थे। हारने वाले। फिर एक रात एक आदमी आया। राज भाई। उसने एक रास्ता दिखाया। पैसे थे उसमें। आसानी थी। और मेरी माँ बीमार थी। घर में कुछ नहीं था। मैंने वह रास्ता चुना। एक बार के लिए। बस एक बार। और उस एक बार में मैं एक ऐसी दुनिया के अंदर चला गया जो मेरे बाप के वक़्त से चल रही थी। एक जाल था। पच्चीस साल पुराना। जिसमें BCCI के बड़े नाम थे। state के selectors थे। एक ऐसा businessman था जिसका नाम हर tournament के banner पर चमकता था और जिसका पैसा उस पूरे network की रीढ़ था। और उस जाल का एक ही काम था। जो खिलाड़ी झुकने से मना करें उन्हें रोकना। उनका career ख़त्म करना। उनका नाम मिटाना। करण सिंह पच्चीस साल पहले उसी जाल में फँसे थे। सुरेंद्र जी बीस साल पहले। और मनोज सिंह। मेरे बाप। जिन्होंने एक रात अपने पाँच साल के बेटे को सोते हुए देखा था और फिर एक diary में लिखा था कि जो आदमी ग़लत के सामने झुकता है वह अपने बच्चे को क्या सिखाएगा। और मना कर दिया था। और रोक दिए गए थे। तीनों ने मना किया था। तीनों को तोड़ा गया था। पर तीनों झुके नहीं थे। और मैं। उनका बेटा। उनका वारिस। मैं उसी जाल में गया था। पर जब मुझे समझ आया कि मैं कहाँ खड़ा हूँ तो एक ही रास्ता था। वही करना जो उन तीनों ने किया था। मना करना। पर इस बार सिर्फ़ मना करना काफ़ी नहीं था। इस बार उस पूरे जाल को सामने लाना था। हर परत को। हर नाम को। हर उस आदमी को जिसने किसी honest खिलाड़ी का सपना पैसों से ख़रीदा था। LAST OVER वह कहानी है। एक confession के रूप में। अर्जुन सिंह की आवाज़ में। पहले शब्द से आख़िरी तक। यह series हर episode में एक नई परत उठाती है। हर twist एक नया सवाल लाता है। हर जवाब एक नई लड़ाई शुरू करता है। और हर बार जब लगता है कि सब ख़त्म हुआ तो एक और चेहरा सामने आता है। एक और आवाज़ निकलती है। एक और कहानी जुड़ती है उस लंबी chain से जिसे किसी ने पच्चीस साल पहले शुरू किया था। यह सिर्फ़ cricket की कहानी नहीं है। यह उन बापों की कहानी है जो अपने बच्चों के लिए सही रास्ता चुनते हैं चाहे उसकी जो क़ीमत हो। यह उन बेटों की कहानी है जो बाप को समझने में देर कर देते हैं। यह उन खिलाड़ियों की कहानी है जिन्हें किसी जाल ने रोका था और जो चुप हो गए थे पर टूटे नहीं थे। और यह उन सबकी कहानी है जिन्होंने कभी किसी ग़लत चीज़ के सामने ना कहा हो। और जिन्हें उस ना की क़ीमत चुकानी पड़ी हो। *"जो आदमी ग़लत के सामने झुकता है — वह अपने बच्चे को क्या सिखाएगा।"*

Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.

E1. वह रात
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E7. वो रात जब सब बदल गया
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E8. दस मिनट
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