
Kaal-Sutra: Mahakal
उज्जैन की एक भयावह रात में, रुद्र के हाथ पर बना जन्मजात 'काल चक्र' अचानक दहक उठता है, जैसे कोई प्राचीन शक्ति जागृत हो रही हो। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के ऊपर....
उज्जैन की एक भयावह रात में, रुद्र के हाथ पर बना जन्मजात 'काल चक्र' अचानक दहक उठता है, जैसे कोई प्राचीन शक्ति जागृत हो रही हो। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के ऊपर बिजली कड़कती है और श्मशान घाट से एक रहस्यमयी, डरावनी आकृति प्रकट होती है, जो रुद्र को उसके पूर्वजों के धोखे का हिसाब चुकाने के लिए ढूंढ रही है। यह आकृति दावा करती है कि रुद्र का रक्त ही पाताल के सातवें द्वार की कुंजी है, और आज रात या तो वह सृष्टि का संहारक बनेगा या महा-असुर का भोजन। जब रुद्र के भीतर से एक अमानवीय शक्ति फूट पड़ती है, तो उसे एहसास होता है कि उसका जीवन एक ऐसे रहस्य से बंधा है जो हजारों साल पुराना है। क्या रुद्र अपने भीतर छिपी इस विनाशकारी शक्ति को नियंत्रित कर पाएगा, या वह उस श्राप का मोहरा बनेगा जो पूरी सृष्टि को भस्म करने वाला है?