
Basal of Ballamok
कहानी का सारांश: यमराज का दामाद "लखनऊ की गलियों से यमलोक के सिंहासन तक—एक साधारण सेल्समैन की असाधारण दास्तां!" यह कहानी है बिट्टू खन्ना की, जो लखनऊ के चौक इलाके में एक....
कहानी का सारांश: यमराज का दामाद "लखनऊ की गलियों से यमलोक के सिंहासन तक—एक साधारण सेल्समैन की असाधारण दास्तां!" यह कहानी है बिट्टू खन्ना की, जो लखनऊ के चौक इलाके में एक मामूली साड़ी सेल्समैन है। उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य बस अपनी माँ का ख्याल रखना और अपने खडूस मालिक 'तिवारी' की डाँट से बचना है। लेकिन नियति ने उसके लिए कुछ और ही सोच रखा था। एक भयानक सड़क हादसे में बिट्टू की मौत हो जाती है और वह पहुँच जाता है सीधे यमलोक। वहां उसे पता चलता है कि उसकी मौत तो एक 'टेक्निकल एरर' (तकनीकी गड़बड़) थी—उसे गलती से उठा लिया गया था! यमराज के दरबार में मचे इस हंगामे के बीच, बिट्टू अपनी 'लखनवी हाज़िरजवाबी' से खुद यमराज और चित्रगुप्त को हैरान कर देता है। यमराज उसे एक अनोखा प्रस्ताव देते हैं—बिट्टू को धरती पर वापस भेजा जाएगा, लेकिन एक शर्त पर। उसे यमलोक का 'स्पेशल एजेंट' बनकर उन खतरनाक रूहों और असुरों को पकड़ना होगा जो पाताल से भागकर इंसानी दुनिया में तबाही मचा रहे हैं। और इस मिशन में उसकी पार्टनर बनती है यमराज की इकलौती और तेज़-तर्रार बेटी—राजकुमारी ज्वाला। कहानी के मुख्य आकर्षण: अनोखा रिश्ता: बिट्टू और ज्वाला के बीच की खट्टी-मीठी तकरार और प्यार, जो एक साधारण इंसान और एक दिव्य शक्ति के बीच पनपता है। देसी तड़का: लखनऊ की ऐतिहासिक भूलभुलैया, अमीनाबाद के बाज़ार और वहां का लजीज खान-पान, जो अलौकिक शक्तियों के युद्ध के बीच भी अपनी चमक बिखेरता है। भयानक दुश्मन: पाताल के सात द्वार, काल-पुरुष का षड्यंत्र और वे प्राचीन असुर जिन्हें हराना नामुमकिन लगता है। महागुरु का साथ: महान योद्धा अश्वत्थामा का बिट्टू के गुरु के रूप में आगमन, जो उसे शस्त्रों और धर्म की शिक्षा देते हैं। जब साड़ियों का सेल्समैन 'समय का स्वामी' बनता है, तो रोमांच, कॉमेडी और एक्शन का एक ऐसा धमाका होता है जिसे आपने पहले कभी नहीं देखा होगा। क्या बिट्टू अपनी माँ की जान बचा पाएगा? क्या वह यमराज का एक काबिल दामाद बन पाएगा? जानने के लिए पढ़िए— "यमराज का दामाद"
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