
अपना देश अपना मिशन
अपना देश, अपना मिशन रात के ठीक बारह बजे थे। दिल्ली की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ इंडिया गेट के पास खड़ी एक काली कार की हेडलाइट्स जल रही....
अपना देश, अपना मिशन रात के ठीक बारह बजे थे। दिल्ली की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ इंडिया गेट के पास खड़ी एक काली कार की हेडलाइट्स जल रही थीं। उसी कार में बैठा था अर्जुन राठौड़—देश की खुफिया एजेंसी का सबसे तेज़ और सबसे रहस्यमय अफ़सर। अर्जुन के हाथ में एक लाल रंग की फ़ाइल थी, जिस पर लिखा था— “मिशन अग्निपथ : अत्यंत गोपनीय” फ़ाइल खोलते ही उसके चेहरे के भाव बदल गए। “देश के अंदर ही कोई दुश्मन है…” “और उसके पास अगला 72 घंटे का समय है…” पहला रहस्य सूचना थी कि देश के सबसे सुरक्षित रक्षा प्रोजेक्ट की जानकारी लीक हो चुकी है। अगर वो जानकारी दुश्मन देश तक पहुँच गई, तो भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। सबसे चौंकाने वाली बात— इस लीक के पीछे कोई बाहरी एजेंट नहीं, बल्कि अपने ही सिस्टम का कोई बड़ा अफ़सर था। अर्जुन को सिर्फ एक सुराग मिला था— एक कोड नाम: “ब्लैक फिनिक्स” दूसरा मोड़ जांच उसे मुंबई ले गई, जहाँ उसकी मुलाक़ात हुई मीरा वर्मा से—एक साइबर एक्सपर्ट। मीरा ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के सर्वर में घुसपैठ किसी आम हैकर की नहीं थी। मीरा बोली, “ये हमला अंदर से हुआ है… और जिसने किया है, वो हमें हर कदम पर देख रहा है।” उसी रात मीरा के लैपटॉप पर एक मैसेज फ्लैश हुआ— “मिशन रोक दो, वरना अंजाम बुरा होगा।” लाइट चली गई। खिड़की का शीशा टूटा। और जब लाइट आई… मीरा गायब थी। तीसरा सच अर्जुन समझ गया—ये सिर्फ जानकारी चुराने का खेल नहीं था, बल्कि देश के भीतर विश्वास तोड़ने की साज़िश थी। 48 घंटे के अंदर उसे पता चला कि “ब्लैक फिनिक्स” कोई और नहीं, बल्कि उसका ही सीनियर ऑफिसर – राघव मल्होत्रा था।
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