
हमज़ाद
यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जो जिंदगी की परेशानियों से तंग आकर अपने हमजाद को वश में करता है इसके बाद क्या होता है यह आपने कभी....
यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जो जिंदगी की परेशानियों से तंग आकर अपने हमजाद को वश में करता है इसके बाद क्या होता है यह आपने कभी भी नहीं सुना होगा तो दोस्तों इसलिए इसको समझने के लिए आपको आज तक इसके साथ जुड़ना होगा तो आइए आगे सुनते हैं एक अंधेरा हो चला था मैं बच्चों को पढ़ाकर घर लौट रहा था दिल बहुत उदास था क्योंकि सालों से गरीबी में रहते-रहते मैं तंग आ गया था लाख मेहनत करने के बाद भी इतना पैसा नहीं मिल पाता था कि घर का खर्चा चला सकुर मैं था तू अकेला लेकिन पेट तो दो वक्त की रोटी मानता ही है आखिर मैं भी जवान था मेरे भी कुछ अरमान थे मैं भी चाहता था कि औरों की तरह इज्जत की जिंदगी हो बड़ा सा घर हो गाड़ी हो पैसा हो और घर को चलाने वाली एक खूबसूरत सी बीवी हो मगर हालत बिल्कुल उल्टे थे घर था तो अगर टूटा-फूटा खंडहर जेब में इतना पैसा भी नहीं था कि पूरा महिला दो वक्त की रोटी खा लूं इतना ही नहीं रिश्तेदारों ने भी साथ छोड़ दिया था कि कहीं मैं उनसे पैसे कमा लो अक्सर लोग कहा करते थे कि अरे मियां बरामद तुम तो जवान हो कोई काम-धंधा क्यों नहीं करते तो मैं मुस्कुरा कर कह देता जी जरूर मैं काम तलाश कर रहा हूं ऐसा नहीं था मैं काम नहीं करना चाहता था लेकिन जहां भी जाता लोग मुझसे काम में बेईमानी करने को कहते और मुझसे यह सब होता नहीं था इसलिए मैं ज्यादा दिनों तक नौकरी नहीं कर पाता था मगर लोगों से क्या कहता बस यही कह देता था कि कोशिश कर रहा हूं
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