
बेइंतहा इश्क़
प्यार… एक ऐसा एहसास, जिसकी परिभाषा वक्त के साथ बदल गई। कभी ये एहसास आंखों की खामोशी में छिपा होता था, जहां एक नजर में दुनिया थम जाती थी। तब लोग....
प्यार… एक ऐसा एहसास, जिसकी परिभाषा वक्त के साथ बदल गई। कभी ये एहसास आंखों की खामोशी में छिपा होता था, जहां एक नजर में दुनिया थम जाती थी। तब लोग दिल से जुड़ते थे, बिना किसी लालच के। आज? प्यार एक हैशटैग बनकर रह गया है। जहां पहले लोग हाथ छूने से डरते थे, वहीं अब लोग जिस्म तक सीमित हो चुके हैं। आकर्षण को लोग प्यार कहने लगे हैं। सवाल ये है… क्या इस दुनिया में अब भी सच्चा प्यार बाकी है? वो लड़की भी यही सोचती थी। उसे ऐसा साथी चाहिए था जो उसकी रूह से मोहब्बत करे, उसके तन से नहीं। जो उसके आंसू समझे, उसके खामोश लफ्ज़ पढ़ ले। उसे डर था कि कहीं ये ख्वाहिशें सिर्फ कहानियों तक न रह जाएं। दूसरी तरफ़… एक लड़का था, जिसे प्यार से नफरत उसके लिए रिश्ते सिर्फ मतलब तक अच्छे होते हैं। इमोशन उसके लिए कमजोरी थी। उसकी ज़िंदगी का नियम साफ था—“जो काम आए, वही सही… बाकी सब फालतू।” उसके लिए मोहब्बत सिर्फ एक झूठ था, एक बेकार खेल। दो सोच… दो रास्ते… और एक टकराव। वो मानती थी कि प्यार दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ है। वो मानता था कि ये सिर्फ बर्बादी है। लेकिन किस्मत हमेशा इंसान की सोच से बड़ी होती है। वक्त आने वाला था जब ये दोनों आमने-सामने होंगे… और उसके बाद, सब कुछ बदल जाएगा। आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए बेइंतेहा इश्क़