
The Legend Gods
यह कथा एक ऐसे युगपुरुष की है, जिसे संसार ने देवता माना— पर जिसकी मृत्यु के बाद वही संसार भेड़ियों में बदल गया। निखिल (मनीष) — जिसकी तलवार ने आकाशगंगाओं को झुकाया, जो “दशों....
यह कथा एक ऐसे युगपुरुष की है, जिसे संसार ने देवता माना— पर जिसकी मृत्यु के बाद वही संसार भेड़ियों में बदल गया। निखिल (मनीष) — जिसकी तलवार ने आकाशगंगाओं को झुकाया, जो “दशों दिशाओं का स्वामी” और “गूढ़ शक्ति का तलवारधारी” कहलाया— उसकी शोक सभा में बाहर देवताओं का संहार चल रहा है, और भीतर एक युवती, सम्राज्ञी शीतल, मौन होकर ताबूत के सामने नतमस्तक है। मृत्यु की खबर फैलते ही, पुराने शिष्य, संप्रदाय, देवता और कभी चरणों में झुकने वाले लोग उसकी विरासत और दिव्य खजानों के लिए एक-दूसरे का खून बहाने लगते हैं। विश्वासघात यहीं नहीं रुकता। जिस शिष्या को उसने बाल्यकाल से पाला, जिसे उसने सबसे अधिक स्नेह और भरोसा दिया— वही शीतल अपनी असली शक्ति और महत्वाकांक्षा प्रकट करती है। और जिस वरिष्ठ शिष्य को उसने उत्तराधिकारी माना— वही सबसे पहले गद्दारी करता है। खजानों के लालच में गुरु–शिष्य का रिश्ता टूट जाता है, और तलवारें एक-दूसरे के विरुद्ध उठ जाती हैं। शीतल, अकेले ही देवताओं का संहार कर, पूरे वनांचल पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेती है और स्वयं को संसार की सम्राज्ञी घोषित कर देती है। लेकिन जब वह गुरु के ताबूत को खोलती है— तो वहाँ न शव होता है, न वह तलवार, जिसके लिए सबने रक्त बहाया था। क्योंकि निखिल मरा नहीं था। यह सब उसकी योजना थी— पुनर्जन्म लेकर, फिर से साधना करने की योजना। अब, पाँच सौ वर्ष बाद, वह एक साधारण युवक के रूप में गुआंगलिंग नगर में खड़ा है— शांत, अकेला, पर भीतर वही ठंडी प्रतिज्ञा जल रही है। जो गद्दार थे… जो उसकी मृत्यु पर हँसे थे… जो उसकी विरासत पर टूट पड़े थे— उसके लौटने पर, उनका हिसाब तय है।