
Dilshad Shamim Adhuri Kah
Content: दिलशाद जैसे-जैसे बड़ा हो रहा था, वैसे-वैसे उसके सपने भी बड़े होते जा रहे थे। लेकिन गरीबी उसकी राह में हमेशा दीवार बनकर खड़ी रहती। 12वीं क्लास में पहुँचने पर उसकी....
Content: दिलशाद जैसे-जैसे बड़ा हो रहा था, वैसे-वैसे उसके सपने भी बड़े होते जा रहे थे। लेकिन गरीबी उसकी राह में हमेशा दीवार बनकर खड़ी रहती। 12वीं क्लास में पहुँचने पर उसकी सबसे बड़ी परेशानी थी— किताबें। उसके पास नई किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे। दोस्तों से पुरानी किताबें माँगकर, उधार लेकर और कई बार फटे-पुराने पन्नों से ही वह पढ़ाई करता। गाँव के लोग अक्सर ताने देते— “इतनी पढ़ाई करके करेगा क्या? आखिर में तो खेती ही करनी है।” लेकिन दिलशाद चुपचाप मुस्कुरा देता और कहता— “मेरे सपनों की फसल ज़मीन पर नहीं, आसमान में उगेगी।” पर उसी बीच उसकी मुलाक़ात हुई… सना नाम की एक लड़की से। सना उसकी क्लासमेट थी, हँसमुख और सादगी भरी। वह अक्सर दिलशाद को हिम्मत देती। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहराई लेने लगी। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर