
Champion Mukkebaaj
यह कहानी है सूरज की. उन्नीस साल का एक गरीब लड़का. मेरठ में रहता है. उसके पिता का नाम भानू है. भानू कभी बहुत अच्छा मुक्केबाज था. पर उसने कभी....
यह कहानी है सूरज की. उन्नीस साल का एक गरीब लड़का. मेरठ में रहता है. उसके पिता का नाम भानू है. भानू कभी बहुत अच्छा मुक्केबाज था. पर उसने कभी फिक्सिंग नहीं की. इसलिए उसकी टांग तोड़ दी गई. आज वह लंगड़ा है. एक टांग से चलता है. पर फिर भी वह अपने बेटे को मुक्केबाजी सिखाता है. फ्लाईओवर के नीचे. टायरों पर मुक्के मारकर. सूरज की माँ बीमार रहती है. उसकी बहन सुमन की शादी के लिए पैसे नहीं हैं. घर में दाल तक को नसीब नहीं होती. ऐसे में सूरज के पास एक ही रास्ता है. मुक्केबाजी. राज्य स्तरीय टूर्नामेंट जीतना. बीस हज़ार रुपये कमाना. पर उसके रास्ते में खड़े हैं लोग. बहुत सारे लोग. कोच शमशेर सिंह. वही आदमी जिसने उसके पिता की टांग तोड़ी थी. उसका भतीजा अर्जुन. अकादमी का राजकुमार. और काका. मेरठ का खेल माफिया. जो हर मैच फिक्स करवाता है. जो हर ट्रॉफी बेचता है. जिसके आगे कोई नहीं बोल सकता. यह कहानी है एक लड़के की जो अकेला है. बिना पैसे के. बिना सहारे के. बिना किसी कोच के. पर उसके पास एक चीज है. अपने पिता का सिखाया हुआ हुनर. और एक सपना. कि वह एक दिन इतना बड़ा मुक्केबाज बनेगा कि सारे सिस्टम उसके सामने घुटने टेक देंगे. सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे सूरज अपने पिता की मौत के बाद सरकारी अकादमी में दाखिला लेता है. वहाँ उसे पता चलता है कि खेल अब खेल नहीं रहा. वहाँ राजनीति है. दलाली है. रिश्वत है. फिक्सिंग है. कोच शमशेर उसे अपना गुलाम बनाना चाहता है. अर्जुन उसे मारना चाहता है. काका उसे खरीदना चाहता है. पर सूरज किसी के आगे नहीं झुकता. वह लड़ता है. अकेले. बिना किसी मदद के. सीरीज में गाँव और कस्बों की जिंदगी भी दिखाई गई है. मेरठ की गलियाँ. फ्लाईओवर के नीचे का जिम. गरीब घर की माँ जो बेटे के लिए दाल बचाकर रखती है. बहन जो अपनी शादी के गहने गिरवी रखने को तैयार हो जाती है. पड़ोस के लोग जो एक दिन हँसते हैं तो दूसरे दिन मदद को आ जाते हैं. सीरीज में सियासत भी है. खेल संघ की राजनीति. अकादमी की सत्ता. काका और नेताओं के गठजोड़. कैसे एक गरीब लड़के का सपना उन लोगों के लिए मजाक होता है. और कैसे वही लड़का एक दिन उन सबके लिए सपना बन जाता है. सीरीज में गैंग्स और माफिया भी हैं. काका का पूरा नेटवर्क. सट्टेबाजी. फिक्सिंग के धंधे. हत्या. धमकियाँ. पर सूरज नहीं डरता. वह जानता है कि सच्चाई के सामने हर झूठ हारता है. और वह सच्चाई है. उसकी मेहनत. उसका पसीना. उसके पिता का दस्ताना. और उसका वादा – कभी हार नहीं मानूंगा. सीरीज में डॉक्टर भी हैं. एक बूढ़ा डॉक्टर दयाशंकर जो सूरज को मुफ्त इलाज करता है. उसके पिता का इलाज करता है. पर बाद में काका उसे ब्लैकमेल कर लेते हैं. वह मजबूर हो जाता है. पर आखिर में वह सूरज के लिए खड़ा हो जाता है. सीरीज में खिलाड़ी भी हैं. रणवीर. अर्जुन. और बहुत से अन्य. कुछ सूरज के दोस्त बनते हैं. कुछ दुश्मन. कुछ उससे जलते हैं. कुछ उससे प्रेम करते हैं. पर हर कोई उसका नाम जानता है. और हर कोई जानता है कि सूरज मतलब है – लोहा. जो कभी नहीं टूटता. सीरीज में स्पोर्ट्स अकादमी का पूरा जीवन दिखाया गया है. सुबह चार बजे उठना. पाँच किलोमीटर दौड़ना. सौ पुशअप्स. सौ सिटअप्स. घंटों स्पैरिंग. चोटें. दर्द. खून. पसीना. और उसके बाद भी मुस्कुराना. क्योंकि तुम्हें अपने पिता से वादा किया है. यह कहानी एक शून्य से हीरो बनने की कहानी है. एक लड़के की जिसके पास कुछ नहीं था. न पैसा. न जूते. न दस्ताने. बस एक टूटा हुआ दस्ताना था. अपने पिता का. और उस दस्ताने में उसके पिता की रूह बसती थी. जो उसे हर मुश्किल वक्त में कहती थी – उठ बेटे. लड़. अभी बहुत कुछ बाकी है. सीरीज की शुरुआत होती है इंटरनेशनल रिंग से. जहाँ सूरज दुनिया के सबसे ताकतवर मुक्केबाज से लड़ रहा है. तब फ्लैशबैक में चली जाती है कहानी. दिखाती है कि वह सूरज जो आज दुनिया के सामने खड़ा है, कभी मेरठ के फ्लाईओवर के नीचे टायर मारता था. कैसे उसके पिता ने उसे मुक्केबाजी सिखाई. कैसे उसके पिता मारे गए. कैसे वह अकेला पड़ गया. कैसे उसने सरकारी अकादमी में दाखिला लिया.
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.
E1. रिंग का सुल्तान
E2. चल चला चल
E3. ट्रेनिंग हुई सुरुआत
E4. आमना सामना
E5. टूर्नामेंट की बारी
E6. फाइनल फाइट


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