
Gods Eyes
बचपन में ही अपने माता-पिता को खोने के बाद, उसे एक ऐसी दुनिया में ज़िंदा रहना था जिसे वह देख भी नहीं सकता था... वह अंधा था और बिल्कुल अकेला। 'मार्शल....
बचपन में ही अपने माता-पिता को खोने के बाद, उसे एक ऐसी दुनिया में ज़िंदा रहना था जिसे वह देख भी नहीं सकता था... वह अंधा था और बिल्कुल अकेला। 'मार्शल आर्ट्स' और 'आत्मा-बंधन' वाले इस नए युग के समाज में उसे एक 'परजीवी' (Parasite) या बोझ समझा जाता था। हालात ने उसे वक्त से पहले समझदार बना दिया था। उसकी सोच अपनी उम्र के बाकी बच्चों से बिल्कुल अलग थी, इसलिए लोग उसके बारे में क्या बुरा-भला कहते हैं, उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। जिस दिन उसकी 'आत्मा' जागी, वह हताशा में रो पड़ा। ऐसा लगा जैसे ऊपर वाले ने उसके साथ कोई भद्दा मज़ाक किया हो... लेकिन असल में, उसकी 'आत्म-जागृति' एक छिपा हुआ वरदान थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह न तो अंधा है और न ही कोई बोझ... जब तक कि वह आखिरी पल नहीं आया... जब उसने अपनी चमकती हुई सुनहरी आँखें खोलीं। वे आँखें, जो शिखर तक जाने वाले उसके रास्ते में आने वाली हर रुकावट को मिटाने के लिए बेताब थीं। इस विशाल दुनिया में आरव के साहसिक सफर का हिस्सा बनें। (कुछ पाठकों को शायद गहरा विवरण और जानकारी पसंद न हो, लेकिन मुझे पसंद है!)