
Tarbiyat_दो बहनों की
"Tarbiyat_दो बहनों की " दो बहनों — अक्सा और अबीहा — की दिल को छू लेने वाली कहानी है, जो एक ही खून से जुड़ी हुई हैं लेकिन अलग-अलग माहौल....
"Tarbiyat_दो बहनों की " दो बहनों — अक्सा और अबीहा — की दिल को छू लेने वाली कहानी है, जो एक ही खून से जुड़ी हुई हैं लेकिन अलग-अलग माहौल और परवरिश में पली-बढ़ी हैं। यह कहानी न केवल बहनों के रिश्ते की गहराई को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि संस्कार, माहौल और मोहब्बत इंसान के स्वभाव को कैसे आकार देते हैं। अक्सा, जो अपने नानीहाल लखनऊ में बचपन से रह रही है, वहाँ दादी-दादा, चार मामा और एक मामी के लाड़-प्यार में पली-बढ़ी। उसे हर छोटी-बड़ी ज़रूरत बिना मांगे पूरी मिलती है, लेकिन इसी जरूरत से ज़्यादा प्यार ने उसमें जिद और बदतमीज़ी भर दी है। मोबाइल उसकी दुनिया बन चुका है और वह अपने आसपास के लोगों की बातों को नजरअंदाज़ करने लगी है। उसकी परवरिश में डिसिप्लिन और तालीम की कमी साफ़ नजर आती है। वहीं दूसरी तरफ अबीहा, जो अपने माता-पिता के साथ एक गाँव में रहती है, बहुत ही संवेदनशील, आज्ञाकारी और मासूम बच्ची है। उसके अब्बू की परवरिश में मोहब्बत तो है लेकिन हद से ज़्यादा छूट नहीं। उसकी माँ उसे धीरे-धीरे अच्छे बर्ताव और तहजीब सिखाती है। अबीहा की दुनिया सादा है लेकिन भावनाओं से भरी हुई है। कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब अबीहा एक महीने के लिए लखनऊ आती है और पहली बार अक्सा से मिलती है। शुरू में दोनों के बीच दूरी होती है, लेकिन धीरे-धीरे मोबाइल गेम्स और कार्टून के ज़रिए उनके बीच दोस्ती और बहनापा पनपने लगता है। दो अलग परवरिश की ये बच्चियाँ एक-दूसरे की दुनिया में झाँकती हैं। लेकिन जब अबीहा को अचानक वापस गाँव लौटना पड़ता है, तब अक्सा की दुनिया फिर से खाली हो जाती है। इसी खालीपन में उसे अपनी गलतियाँ समझ में आने लगती हैं। नानी की थकावट, मामा की नाराजगी, और अबीहा की याद मिलकर अक्सा के अंदर एक बदलाव की शुरुआत करते हैं। धीरे-धीरे वह घर के कामों में मदद करने लगती है, नानी का साथ देती है, और मोबाइल से दूरी बनाती है। एक दिन वह कहती है: "मोबाइल ज़रूरत की चीज़ है, ज़िन्दगी नहीं।" "Tarbiyat" केवल बहनों की कहानी नहीं है, यह एक ऐसी सामाजिक सीख है जो यह दर्शाती है कि मोहब्बत अगर हद से ज़्यादा हो तो बर्बादी बन सकती है, लेकिन समझदारी से दी गई परवरिश इंसान को बेहतर बना सकती है। यह कहानी हर उस घर की तस्वीर है जहाँ बच्चों की परवरिश एक जिम्मेदारी है — सिर्फ प्यार देने की नहीं, बल्कि तर्बियत की भी।
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