
"शून्यसिंहासन: विशारदेवी की कथा"
कुछ रानियाँ तलवारों से इतिहास लिखती हैं... और कुछ, सिर्फ एक नज़र और एक निर्णय से साम्राज्य हिला देती हैं।” कश्मीर की घाटियों से आती है एक सच्ची मगर अनकही कहानी... एक युवती,....
कुछ रानियाँ तलवारों से इतिहास लिखती हैं... और कुछ, सिर्फ एक नज़र और एक निर्णय से साम्राज्य हिला देती हैं।” कश्मीर की घाटियों से आती है एक सच्ची मगर अनकही कहानी... एक युवती, जो पैदा तो एक छोटे राज्य में हुई थी — मगर सोच ऐसी, कि सम्राटों ने उसकी आँखों में घुटने टेक दिए। वो थी – विशारदेवी। राजा की बेटी। पुस्तकों की प्रेमी। रणनीति की ज्ञाता। और इतिहास की सबसे अदृश्य लेकिन सबसे ताक़तवर महारानी। जब सम्राट ललितादित्य की सेनाएँ पहाड़ों की ओर बढ़ीं, जब कुटिलगढ़ के दरबार में डर बैठ गया... तब एक लड़की उठी। ना तलवार ली, ना आँसू बहाए। बस बोली — "राज्य छोटे हो सकते हैं, पर सोच नहीं। अब से, कुटिलगढ़ मेरी ज़िम्मेदारी है।" “ये कहानी है एक रानी की — जिसने बुद्धि से सम्राटों को जीता, शब्दों से युद्ध रोके, और इतिहास से अपना नाम चुराया…” अब समय है, वो नाम वापस लाने का।